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कांग्रेस को सता रहा भितरघात का डर !

6 विधायकों पर टिकी है राज्यसभा सीट की उम्मीदें

भोपाल मप्र में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में उम्मीदवारों को लेकर दावेदारों ने सक्रियता बढ़ा दी है, जिससे सूबे का सियासी गणित रोचक हो गया है। इनमें भाजपा के खाते की दो सीटें और कांग्रेस की एक सीट है। ऐसे में राज्यसभा में जाने के लिए नेताओं ने चौसर बिछानी शुरू कर दी है। इससे पहले हरियाणा, उड़ीसा में क्रॉस वोटिंग के बाद मप्र कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है। इसी कड़ी में कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़ेबंदी करेगी। राज्यसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस विधायकों को कांग्रेस शासित राज्य में भेजा जा सकता है। कांग्रेस शासित राज्य में विधायकों को भेजने पर मंथन हुआ है। मप्र में तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। राज्यसभा चुनाव को लेकर मई में नोटिफिकेशन जारी होगा। । राज्यसभा सीट के लिए 58 विधायकों का समर्थन चाहिए। आंकड़ों के हिसाब से दो सीट भाजपा के खाते में जाएगी। मप्र कांग्रेस के पास फिलहाल 65 विधायक है। 65 विधायक में से बीना विधायक निर्मला सप्रे भाजपा के मंच पर लगातार नजर आ रही है। मुकेश मल्होत्रा विधायक रहेंगे या नहीं मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है। इधर भाजपा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पार्टी मिशन 5 विधायक पर काम कर रही है। यानी कि भाजपा का प्रयास रहेगा कि कांग्रेस के 5 विधायक क्रॉस वोटिंग कर दे, जिससे कांग्रेस के खाते वाली एक सीट पर भी भाजपा की विजय हो जाए और इस चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह से क्लीन स्वीप हो जाए। 6 विधायकों से हो सकता है खेला-राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस को 58 विधायक चाहिए। लेकिन, अगर 6 विधायक यहां के वहां हो गए तो कांग्रेस की सीट फंस सकती है। भाजपा के पास फिलहाल 164 विधायक हैं, जबकि बीना विधायक के सपोर्ट से भाजपा की संख्या 165 हो जाएगी। ऐसे में दो सीटों पर 58-58 विधायक वोट करने के बाद भी भाजपा के पास 49 विधायक बचते हैं। ऐसे में भाजपा अगर तीसरा प्रत्याशी भी खड़ा करती है तो मध्य प्रदेश में राज्यसभा का चुनाव दिलचस्प हो जाएगा। यही वजह है कि कांग्रेस को राज्यसभा सीट बचाने के लिए टेंशन हो सकती है। खास बात यह है कि मध्य प्रदेश में एक विधायक भारत आदिवासी पार्टी से कमलेश्वर डोडियार भी हैं। ऐसे में उनका वोट भी अहम हो जाएगा। यही वजह है कि कांग्रेस अभी से भाजपा पर राज्यसभा चुनाव में जोड़ तोड़ के लिए आरोप लगा रही है। इधर दिल्ली में पिछले तीन दिनों से कांग्रेस मंथन में जुटी हुई है। बुधवार को आदिवासी कांग्रेस की बैठक हुई, जिसमें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित दूसरे आदिवासी नेता भी मौजूद रहे। सूत्रों की मानें तो इस बैठक में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग पर चर्चा हुई और उसे मध्यप्रदेश की तीन सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव से जोड़ते हुए आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई। बैठक में आदिवासी विधायकों की किलेबंदी से लेकर उनसे सतत संपर्क करने का निर्णय लिया गया।

हरियाणा में कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और चार वोट रद्द हुए है। हरियाणा में हुए सियासी घटनाक्रम से मध्य प्रदेश कांग्रेस चिंतित है। पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश नेतृत्व सतर्क है। इसे लेकर पिछले तीन दिन से कांग्रेस दिल्ली में बैठकर रणनीति बना रही है। इसमें उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे सहित दूसरे विधायकों की नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस के एक विधायक ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि पार्टी में कुछ ऐसे भी विधायक हैं, जो भाजपा से नजदीकी से जुड़े हुए हैं। कुछ विधायकों के करीबी भाजपा अहम पद पर हैं, जिससे उन्हें लेकर असमंजस्य की स्थिति है

मप्र में कांग्रेस की राज्यसभा सीट के लिए टेंशन क्यों बढ़ रही है। इसके पीछे कुछ वजहें हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश में 230 विधायक हैं। ऐसे में तीन राज्यसभा सीटों के हिसाब से एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। 164 विधायकों के दम पर भाजपा दो सीटें आसानी से जीतेगी। जबकि कांग्रेस को अपनी एक सीट बचाने के लिए 58 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। अब मामला यह है कि कांग्रेस के पास फिलहाल आंकड़ों के मुताबिक 65 विधायक हैं।

राज्यसभा की पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह वाली सीट कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन सकती है। कांग्रेस को डर है कि इस सीट को अपने पाले में करने के लिए भाजपा उनके दल के साथ खेल कर सकती है। सूत्रों की मानें तो इस सीट को पाने भाजपा मिशन के तहत काम कर रही है, तो कांग्रेस इसे लेकर दिल्ली में रणनीति बनाने में जुटी हुई है। जानकारों का कहना है कि भाजपा के रणनीतिकारों की नजर कांग्रेस के ऐसे विधायकों पर है, जो किसी न किसी वजह से अपने नेतृत्व और नेताओं से नाराज चल रहे हैं। भाजपा कांग्रेस की इसी कमजोर कड़ी के आधार पर एक सीट जीतने की कोशिश में लगी हुई है।

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