
इंदौर हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना वाग्देवी मंदिर, ASI सर्वे जारी रखने के निर्देश
भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अपने फैसले में माना कि भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर था और रहेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा परिसर का सर्वे लगातार जारी रखा जाएगा। इस फैसले के बाद हिंदू संगठनों और याचिकाकर्ताओं ने इसे सनातन धर्म की जीत बताते हुए ऐतिहासिक निर्णय कहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।
पांच याचिकाओं और एएसआई रिपोर्ट के आधार पर आया फैसला
जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में भोजशाला मामले को लेकर याचिका दायर की गई थी। इसके बाद से यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना रहा। मामले में पुरातात्विक साक्ष्य, ऐतिहासिक दस्तावेज और एएसआई की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के सामने प्रस्तुत की गई।
हाईकोर्ट के जस्टिस विनय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डबल बेंच ने अपने फैसले में कहा कि 11वीं शताब्दी में परमार वंश के महान राजा भोज के शासनकाल में भोजशाला की स्थापना मां सरस्वती (वाग्देवी) के मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र के रूप में की गई थी। कोर्ट ने यह भी माना कि परिसर में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित किए जाने का रास्ता खुला है और सरकार इस दिशा में उचित कदम उठा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी सर्वे रोकने से किया था इनकार
मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कमाल मौला मस्जिद में सर्वे पर रोक लगाने और नमाज की अनुमति देने की मांग की गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस अपील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट को फैसला सुनाने की अनुमति दे दी थी।
इसके बाद ASI की रिपोर्ट और सभी पक्षों की दलीलों पर सुनवाई पूरी होने के बाद इंदौर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया।
मुस्लिम पक्ष करेगा सुप्रीम कोर्ट का रुख
फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने कहा कि वे इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। साथ ही सरकार से फैसले की पुनर्समीक्षा की मांग भी की जा सकती है।
इन लोगों की रही अहम भूमिका

मामले में सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सनातन संस्कृति और ऐतिहासिक तथ्यों की जीत है। वहीं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी, धार भोज उत्सव समिति की ओर से पैरवी कर रहे श्रीष दुबे, धार कमाल मौला वेलफेयर ट्रस्ट के वकील अशहर वारसी, राजा भोज समिति धार के वकील मनीष गोयल और ASI की ओर से पक्ष रखने वाले अविरल विकास खरे भी पूरे मामले में प्रमुख रूप से शामिल रहे।
क्या है भोजशाला विवाद
धार स्थित भोजशाला को हिंदू पक्ष मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। वर्षों से यह मामला धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का केंद्र बना हुआ था। हर मंगलवार हिंदू पक्ष को पूजा और शुक्रवार मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी जाती रही है। अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है और आगे सुप्रीम कोर्ट में इस विवाद की अगली कानूनी लड़ाई देखी जा सकती है।




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