3350 साइबर शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, हजारों फर्जी बैंक खाते फ्रीज, 180 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट रिकवर
इन्दौर। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच इंदौर पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच लगातार ठगी के शिकार लोगों को राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में क्राइम ब्रांच की फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीम ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के पीड़ितों को कुल 2 करोड़ 36 लाख 77 हजार 576 रुपये की राशि वापस दिलाने में सफलता हासिल की है।
पुलिस कमिश्नरेट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अप्रैल 2026 तक साइबर हेल्पलाइन और क्राइम ब्रांच साइबर सेल को कुल 3350 शिकायतें प्राप्त हुईं। शिकायतें मिलते ही विशेषज्ञ टीमों ने तकनीकी जांच शुरू कर संबंधित बैंक खातों और ट्रांजेक्शनों को ट्रैक किया। त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ी राशि को अपराधियों तक पहुंचने से पहले ही होल्ड कराया गया और बाद में पीड़ितों के खातों में वापस जमा कराया गया।
माहवार रिकवरी का आंकड़ा
क्राइम ब्रांच की वित्तीय रिकवरी के आंकड़े इसकी सक्रियता को दर्शाते हैं। जनवरी माह में 36 लाख 46 हजार 49 रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए। फरवरी में यह आंकड़ा बढ़कर 91 लाख 95 हजार 726 रुपये तक पहुंच गया। मार्च माह में 59 लाख 5 हजार 830 रुपये तथा अप्रैल माह में 49 लाख 29 हजार 971 रुपये की राशि सफलतापूर्वक आवेदकों को वापस कराई गई।
फर्जी बैंक खातों पर भी कार्रवाई
सिर्फ रकम वापस कराने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही। जांच के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हजारों संदिग्ध और फर्जी बैंक खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज कराया गया। इससे साइबर अपराधियों के नेटवर्क को आर्थिक रूप से बड़ा झटका लगा है और भविष्य में होने वाली ठगी की घटनाओं पर भी अंकुश लगाने में मदद मिली है।
180 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट रिकवर
क्राइम ब्रांच ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। इस अवधि में 180 से अधिक हैक किए गए सोशल मीडिया अकाउंट्स को रिकवर कर उनके वास्तविक संचालकों को वापस सौंपा गया। इसके अलावा नागरिकों के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर बनाए गए 200 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को भी ब्लॉक कराया गया।
इन तीन तरीकों से हो रही सबसे ज्यादा ठगी
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि इंदौर में वर्तमान समय में साइबर ठगी मुख्य रूप से तीन तरीकों से की जा रही है।
पहला, इन्वेस्टमेंट और टास्क फ्रॉड, जिसमें शेयर ट्रेडिंग, ऑनलाइन गेमिंग या टास्क पूरा कर भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों से निवेश कराया जाता है।
दूसरा, बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने वाले ठग, जो केवाईसी अपडेट, रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम या क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर ओटीपी, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी हासिल कर खाते खाली कर देते हैं।
तीसरा, रिश्तेदार या परिचित बनकर ठगी करना, जिसमें अपराधी सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए किसी परिचित की पहचान अपनाकर आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हैं और भावनात्मक दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।
पुलिस की अपील
क्राइम ब्रांच ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी और बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें तथा साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत मिलने पर रकम को होल्ड कर वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
बाइट – मीना चौहान
“इंदौर क्राइम ब्रांच साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार त्वरित कार्रवाई कर रही है। आम नागरिकों से अनुरोध है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या निवेश ऑफर पर भरोसा न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, जिससे समय रहते रकम को रिकवर किया जा सके।”




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