इंदौर। शहर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर परिसर में प्रस्तावित कई विकास कार्य लंबे समय से शुरू नहीं हो पाए हैं। मंदिर प्रबंध समिति और जिला प्रशासन के बीच समुचित समन्वय नहीं होने के कारण करोड़ों रुपये की योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी हैं। इसका असर श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर के विकास के लिए पहले से कई महत्वपूर्ण कार्यों की योजना तैयार की गई थी। इन कार्यों को एक तय मास्टर प्लान के अनुसार शुरू किया जाना था, लेकिन अब तक अधिकांश योजनाओं पर अमल नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि पिछले लगभग पांच से छह महीनों से कई प्रस्ताव लंबित हैं और अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
सूत्रों के मुताबिक, मंदिर परिसर में पहले भी जनसहयोग से कई विकास कार्य किए गए हैं, लेकिन वर्तमान में प्रस्तावित योजनाएं प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति के बीच तालमेल की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इसी वजह से श्रद्धालुओं को मिलने वाली कई सुविधाएं भी अधूरी हैं। मंदिर परिसर में भक्त सदन, सत्संग हॉल और भोजनशाला जैसी सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है। साथ ही बड़े स्तर पर भोजन वितरण व्यवस्था विकसित करने की योजना भी बनाई गई थी, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को प्रसाद उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि, इन योजनाओं पर अब तक ठोस प्रगति नहीं हो पाई है।
खजराना गणेश मंदिर प्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। यहां बुधवार, शनिवार और रविवार को हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भीड़ को देखते हुए परिसर में सुविधाओं का विस्तार जरूरी माना जा रहा है। प्रस्तावित योजनाओं में श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त विश्राम स्थल, बेहतर यातायात व्यवस्था और बड़े पार्किंग क्षेत्र का निर्माण भी शामिल है, ताकि चारपहिया और दोपहिया वाहनों की पार्किंग सुचारु रूप से हो सके। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि मंदिर प्रबंध समिति और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो जाए, तो लंबे समय से लंबित विकास कार्य जल्द शुरू हो सकते हैं और श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।



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