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इंदौर में फिर गूंजा हनीट्रैप कांड, कारोबारी से 1 करोड़ की रंगदारी मांगने वाली गैंग का पर्दाफाश

इंदौर में एक बार फिर हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का बड़ा मामला सामने आया है, जिसने साल 2019 के चर्चित हनीट्रैप कांड की यादें ताजा कर दी हैं। इस बार निशाने पर शहर का एक बड़ा शराब और प्रॉपर्टी कारोबारी रहा, जिससे कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये की रंगदारी और कारोबार में हिस्सेदारी मांगी गई। मामले में 2019 के कुख्यात हनीट्रैप कांड की मुख्य आरोपी श्वेता जैन को भोपाल से हिरासत में लिया गया है। वहीं एक महिला शराब तस्कर, उसका बेटा, एक अन्य आरोपी और इंटेलिजेंस विंग के प्रधान आरक्षक की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।

कारोबारी ने पुलिस कमिश्नर से लगाई गुहार

जानकारी के मुताबिक बाणगंगा क्षेत्र निवासी 45 वर्षीय शराब और प्रॉपर्टी कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान लंबे समय से ब्लैकमेलिंग और धमकियों से परेशान थे। आखिरकार उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर से की। शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच ने पूरे मामले को बेहद गोपनीय तरीके से जांच में लिया और एक विशेष टीम गठित की गई।

महिला तस्कर ने दोस्ती के जरिए बुना जाल

पुलिस जांच में सामने आया कि कारोबारी की कुछ साल पहले द्वारकापुरी क्षेत्र की रहने वाली अलका दीक्षित से पहचान हुई थी। अलका पहले से अवैध शराब तस्करी के मामलों में सक्रिय बताई जा रही है। आरोप है कि अलका ने कारोबारी से नजदीकियां बढ़ाईं और फिर धोखे से उनके निजी वीडियो और तस्वीरें तैयार कर लीं।

इसके बाद ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू हुआ। गैंग के सदस्य लाखन चौधरी ने कारोबारी पर दबाव बनाया कि वे अपने कारोबार में अलका दीक्षित को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी दें। जब कारोबारी ने इसका विरोध किया तो धमकियों का दौर शुरू हो गया।

सुपर कॉरिडोर पर रोककर की मारपीट

फरियादी के मुताबिक करीब 20 दिन पहले सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप और लाखन चौधरी ने कारोबारी को बीच सड़क पर रोक लिया। आरोप है कि आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और गोली मारने तक की धमकी दी।

गैंग ने कथित तौर पर कहा कि यदि 1 करोड़ रुपये और कारोबार में हिस्सेदारी नहीं दी गई तो निजी वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए जाएंगे। इसी धमकी के चलते कारोबारी मानसिक दबाव में आ गए थे।

पुलिस के ‘टॉप सीक्रेट’ ऑपरेशन में चार आरोपी गिरफ्तार

मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर क्राइम ब्रांच ने सोमवार तड़के एक गुप्त ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने पहले अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, लाखन चौधरी और इंटेलिजेंस विंग में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद को हिरासत में लिया।

पूछताछ के दौरान पूरे सिंडिकेट की परतें खुलती चली गईं। आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को पता चला कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे 2019 के चर्चित हनीट्रैप कांड की मुख्य आरोपी श्वेता जैन का दिमाग काम कर रहा था।

भोपाल से हिरासत में ली गई श्वेता जैन

क्राइम ब्रांच की टीम तुरंत भोपाल रवाना हुई और मीनाल रेजिडेंसी क्षेत्र से श्वेता जैन को हिरासत में ले लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गैंग ने इंदौर और अन्य शहरों में कितने लोगों को इसी तरह ब्लैकमेल किया है।

पुलिस विभाग के कर्मचारी की भूमिका पर सवाल

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात इंटेलिजेंस विंग के प्रधान आरक्षक विनोद की कथित भूमिका मानी जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी पुलिसकर्मी गैंग को किस तरह से मदद पहुंचा रहा था और क्या उसे पहले से पूरे षड्यंत्र की जानकारी थी।

कई और खुलासों की संभावना

क्राइम ब्रांच अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट, बैंक लेनदेन और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं यह गैंग पहले से सक्रिय किसी बड़े ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं।

डीसीपी ने क्या कहा

मामले में डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश त्रिपाठी ने बताया कि कारोबारी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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