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दस्तावेजों का दुरुपयोग कर निकाला फर्जी लोन, क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपियों का किया खुलासा

इंदौर। इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि एक महिला के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम पर 40 हजार रुपये का फर्जी लोन स्वीकृत कराया गया और लोन की पूरी राशि किसी अन्य महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर कर हड़प ली गई। इस मामले में वित्तीय कंपनी के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर, कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव और एक महिला को आरोपी बनाया गया है।

पुलिस के अनुसार जूनी इंदौर क्षेत्र निवासी अमरीन बैग अपने पति के साथ एक शोरूम में वाशिंग मशीन खरीदने के लिए फायनेंस कराने पहुंची थीं। वहां ऑनलाइन लोन प्रक्रिया के दौरान उनका आवेदन अस्वीकृत हो गया। जब उन्होंने इसके कारणों की जानकारी ली तो पता चला कि उनके नाम पर पहले से ही 40 हजार रुपये का एक लोन चल रहा है। उक्त लोन की किस्तें जमा नहीं होने के कारण उनका सिबिल स्कोर खराब हो चुका था और उन्हें डिफॉल्टर की श्रेणी में दर्ज कर लिया गया था। इस जानकारी से हैरान पीड़िता ने संबंधित फायनेंस कंपनी से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी मांगी। जांच के दौरान सामने आया कि जिस लोन आवेदन के आधार पर राशि स्वीकृत हुई थी, उसमें पहचान और अन्य दस्तावेज तो अमरीन बैग के लगाए गए थे, लेकिन आवेदन में उपयोग की गई फोटो और बैंक खाता किसी दूसरी महिला का था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत क्राइम ब्रांच तक पहुंची। जांच में पता चला कि वर्ष 2023 में आरोहन फाइनेंशियल सर्विसेस लिमिटेड में कार्यरत तत्कालीन कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव राहुल कुमार पोरवाल ने लोन प्रक्रिया के दौरान पीड़िता के दस्तावेज प्राप्त किए थे। आरोप है कि राहुल ने जानबूझकर पीड़िता के दस्तावेजों के साथ सह-आरोपी महिला अमरीन खान की फोटो और बैंक खाते की जानकारी ऑनलाइन आवेदन में अपलोड कर दी। फर्जी तरीके से तैयार किए गए आवेदन के आधार पर 40 हजार रुपये का लोन स्वीकृत हो गया। इसके बाद पूरी राशि आरोपी महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में वित्तीय कंपनी के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपियों ने आपसी मिलीभगत और षड्यंत्र के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया। क्राइम ब्रांच ने शिकायत और जांच रिपोर्ट के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना (फर्जी दस्तावेज तैयार करना), आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने इसी प्रकार अन्य लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर और कितनी वित्तीय धोखाधड़ी की घटनाओं को अंजाम दिया है। डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आरोपियों की भूमिका सामने आई है। मामले में दर्ज प्रकरण के आधार पर आगे की विवेचना जारी है और धोखाधड़ी से जुड़े अन्य तथ्यों की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों के वित्तीय लेन-देन और बैंक खातों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

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