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30 जून के प्रशासनिक तबादले बने प्रतिष्ठा का प्रश्न!

आवेदन की समय-सीमा खत्म होने के बाद भी निरस्तीकरण की कवायद, सीईओ की लौटाई फाइल फिर आयुक्त को भेजी

इंदौर। गत 30 जून को शिक्षा विभाग में हुए प्रशासनिक तबादले अब महज स्थानांतरण आदेश नहीं रह गए हैं, बल्कि कुछ तबादलों को लेकर मामला प्रतिष्ठा का प्रश्न बनता नजर आ रहा है। 15 जुलाई को तबादलों के खिलाफ अभ्यावेदन की अंतिम समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी तबादले निरस्त कराने की कवायद जारी है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ तबादलों को निरस्त कराने के लिए अब प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

बताया जा रहा है कि तबादलों को निरस्त करने से संबंधित फाइल पहले इंदौर सीईओ के समक्ष पहुंची थी, लेकिन वहां से इसे वापस कर दिया गया। इसके बाद वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने इसी फाइल को अब ई-फाइल के माध्यम से लोक शिक्षा आयुक्त के पास भेज दिया है। माना जा रहा है कि फाइल के जरिए कुछ चुनिंदा तबादलों को निरस्त कराने के लिए उच्च स्तर से निर्देश प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि वैसे इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री खुद मुख्यमंत्री हैं और उनके अनुमोदन के बाद समय-सीमा निकल जाने के बाद इस तरह के प्रयास किए जाने को शिक्षा विभाग में बड़ा प्रश्न बताया जा रहा है।

बहरहाल, जब शासन द्वारा जारी तबादला आदेशों के खिलाफ दावा-आपत्ति और अभ्यावेदन की प्रक्रिया के लिए 15 जुलाई अंतिम तारीख निर्धारित थी, तो समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी कुछ तबादलों को निरस्त कराने की कोशिश क्यों की जा रही है? क्या अब प्रशासनिक आदेशों की समीक्षा सामान्य प्रक्रिया के तहत होगी या फिर कुछ खास मामलों में दबाव और सिफारिश के आधार पर निर्णय लिया जाएगा?

सूत्रों की मानें तो कुछ तबादलों को लेकर मामला इतना संवेदनशील हो गया है कि इन्हें निरस्त करना अब प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया गया है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर फाइल लौटने के बाद भी मामला ठंडा नहीं पड़ा और उसे अब लोक शिक्षा आयुक्त स्तर तक ले जाया गया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या आयुक्त स्तर से कलेक्टर को कुछ तबादले निरस्त करने के निर्देश दिए जाते हैं या फिर 30 जून के आदेश अपनी मूल स्थिति में ही लागू रहेंगे।

सवाल जो उठ रहे हैं

  • 15 जुलाई की अंतिम समय-सीमा के बाद भी तबादले निरस्त कराने की कोशिश क्यों?
  • सीईओ द्वारा फाइल लौटाने के बाद उसे फिर उच्च स्तर पर क्यों भेजा गया?
  • क्या कुछ चुनिंदा तबादलों को निरस्त कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है?

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