इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पॉस्को एक्ट के एक बुजुर्ग आरोपी के बेटे को पूछताछ के मामले में बंदी बनाकर रखने और तीस घंटे तक हथकड़ी डालकर बैठाने के मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए इंदौर के चंदन नगर थाने के प्रभारी पर आपराधिक मामला दर्ज करने और विभागीय कांच किए जाने के आदेश दिए हैं, हाईकोर्ट ने हथकड़ी लगाने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
– दरअसल इंदौर के चंदन नगर थाने में पिछले दिनों एक नाबालिग युवती द्वारा 62 वर्षीय बुजुर्ग संजय दुबे पर मामला दर्ज करवाया था, इस मामले में पुलिस संजय की तलाश कर रही थी लेकिन जब संजय पुलिस के हाथ नहीं लगे तो पुलिस ने पूछताछ के लिए संजय के बेटे राजा को महालक्ष्मी नगर के एक सेलून से उठा लिया और अपराधियों की तरह व्यवहार करते हुए थाने में हथकड़ी लगाकर तीस घंटे तक थाने में बंद रखा। यही नहीं पुलिस ने पकड़ने का कोई विधिवत कारण भी नहीं बताया और परिजनों को मिलने भी नहीं दिया गया। जिसके बाद राजा के भाई ने इस मामले में इंदौर हाईकोर्ट में अपने वकील नीरज सोनी के माध्यम से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने बुधवार को सुनवाई करते हुए थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को थाने के सीसीटीवी फुटेज के साथ कोर्ट में हाजिर रहने के आदेश दिए थे। गुरुवार को जब थाना प्रभारी पटेल कोर्ट में हाजिर हुए तो दोनों ही जजों ने पूछा कि क्या आपने राजा को बिना कारण गिरफ्तार किया था?, तो उन्होंने घटना स्वीकार करते हुए बताया कि राजा और इसके पिता संजय एक मामले में कई दिनों से गवाही देने नहीं आ रहे थे लिहाजा राजा को महालक्ष्मी नगर से पड़कर लाया गया था। इस पर माननीय न्यायालय टिप्पणी करते हुए कहा कि आपने इन्हें इतनी देर थाने में बंदी बनाकर क्यों बैठाया? जिस पर थाना प्रभारी पटेल ने जवाब दिया कि उनके भागने की आशंका थी इसलिए इन्हें हथकड़ी बांधकर बैठाया गया था, जिस पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि टी आई पटेल को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने उनके पैरों में बेड़ियां क्यों नहीं डाली यह हथकड़ी सहित भी फरार हो सकते थे। इसके साथ ही माननीय न्यायालय के दोनों न्यायाधीशों ने थाना प्रभारी पटेल के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और विभागीय रूप से पूरी घटना की जांच करने के लिए इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह को निर्देशित किया है साथ ही यह भी कहा है कि 14 दिन के भीतर थाना प्रभारी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और विभागीय जांच की रिपोर्ट हाई कोर्ट के समक्ष पेश की जाए।
बाइट – नीरज सोनी, हाईकोर्ट एडवोकेट







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