फार्मेसी शिक्षा और उद्योग तेजी से बदल रहे हैं। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन ने इस क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
ऑक्सफोर्ड इंटरनैशनल कॉलेज इंदौर में “आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के युग में फार्मेसी क्षेत्र में उभरते करियर अवसर” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में फार्मेसी काऊंसिल इंडिया (भारतीय भेषजीय परिषद) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री जशुभाई हीराभाई चौधरी उपस्थित रहे।

संस्था के समूह निदेशक डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदी ने बताया कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष श्री जशुभाई हीराभाई चौधरी ने विद्यार्थियों को आगामी वर्षों में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती उपयोगिता के बारे में चर्चा की। ऑक्सफोर्ड इंटरनैशनल कॉलेज में आयोजित इस संगोष्ठी में पी.सी.आई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री जशुभाई भाई ने बताया कि आगामी वर्षों में फार्मेसी के पाठ्यक्रमों में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को सम्मिलित किया जा रहा है। अतः प्रत्येक विद्यार्थी को समय के साथ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के साथ अपनी क्षमताओं का विकास करना चाहिये।
मुख्य अतिथि का स्वागत संस्था के संस्थापक डॉ. अक्षय तिवारी एवं समूह निदेशक डॉ. पुनीत द्विवेदी ने किया। स्वागत भाषण समूह निदेशक डॉ. पुनीत द्विवेदी एवं आभार प्राचार्य डॉ. महावीर छाजेड ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नेहा शर्मा चौधरी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रो० प्रितेश पालीवाल, डॉ. शिवेंद्र द्विवेदी (प्राचार्य-इंदौर इंटरनैशनल कॉलेज), अंकित पांचाल, अभिमन्यु सिंह राठौर, मनोज मंडलोई, ज्योति यादव, पूजा सिन्हा, साक्षी अहिरवार, सचिन सिसोदिया, हेनिका राव, अंजलि कुशवाहा, अनिशा पाल आदि उपस्थित रहे।

उभरते करियर अवसर
AI-सक्षम फार्माकोविजिलेंस एनालिस्ट– दवाओं के दुष्प्रभावों की रियल-टाइम निगरानी और मशीन लर्निंग से सुरक्षा संकेतों का विश्लेषण।
ड्रग डिस्कवरी और रिसर्च साइंटिस्ट: AI मॉडल्स की मदद से नई दवाओं की खोज और क्लिनिकल ट्रायल्स का डेटा विश्लेषण।
फार्मेसी डेटा एनालिस्ट: बड़े पैमाने पर मेडिकल और फार्मास्यूटिकल डेटा का विश्लेषण कर निर्णय लेने में सहायता।
डिजिटल हेल्थ और टेलीफार्मेसी विशेषज्ञ: स्मार्ट सिस्टम्स और वर्चुअल प्लेटफ़ॉर्म्स के जरिए मरीजों को दवा परामर्श देना।
ऑटोमेशन सुपरवाइज़र: रोबोटिक डिस्पेंसिंग सिस्टम्स और AI-आधारित वर्कफ़्लो की निगरानी।
क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण?
45% फार्मेसी नियोक्ताओं ने पहले ही AI सिस्टम्स को अपने वर्कफ़्लो में शामिल कर लिया है।
पारंपरिक दवा वितरण कार्यों की जगह अब तकनीकी कौशल और डेटा-आधारित निर्णय लेने की मांग बढ़ रही है।
छात्रों और पेशेवरों को डिजिटल स्किल्स अपनाने होंगे, वरना वे पीछे रह सकते हैं।




Total Users : 9677
Leave a comment