अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान चोरी के मामले में बड़ी जानकारी सामने आई है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है और अब इसे आगे की कार्रवाई के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजा गया है।
मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट में कुल आठ लोगों के नाम शामिल हैं। बताया गया है कि इन लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित दूसरी एसआईटी की जांच अभी जारी है, इसलिए पूरे मामले की अंतिम तस्वीर दूसरी जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
दान चोरी का मामला सामने आने के बाद लगे थे गंभीर आरोप
राम मंदिर में दान चोरी का मामला सामने आने के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया था। मामले को लेकर विपक्षी दलों ने मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े पदाधिकारियों पर सवाल उठाए थे। चंपत राय और अनिल मिश्रा पर भी आरोप लगाए गए थे, जिसके चलते दोनों का नाम विवाद में प्रमुखता से सामने आया था। खबर के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में दोनों के नाम नहीं होने की बात सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
अखिलेश यादव ने सबसे पहले उठाया था मुद्दा
राम मंदिर में दान चोरी के आरोपों का मुद्दा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को उठाया था। उन्होंने मामले को लेकर सवाल खड़े किए थे। इसके जवाब में चंपत राय ने वीडियो शेयर करते हुए लगाए गए आरोपों को गलत बताया था। इसके बाद भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी रही। विपक्षी नेताओं ने मंदिर से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जांच की मांग उठाई।
संजय सिंह भी लगातार हमलावर रहे
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी चंपत राय और श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े मामलों को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। जमीन से जुड़े कथित विवादों को लेकर भी उन्होंने चंपत राय पर निशाना साधा था। दान चोरी के मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़ने के बाद जांच की मांग तेज हुई और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।
13 जून को हुआ था एसआईटी का गठन
मामले में बढ़ते दबाव के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपों की जांच की। जांच के बाद तैयार की गई अंतिम रिपोर्ट में आठ लोगों के नाम सामने आने की जानकारी है। रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम नहीं होने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस जांच में उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए हैं।

दूसरी एसआईटी की जांच अभी जारी
हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित दूसरी एसआईटी अभी इस पूरे मामले की जांच कर रही है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामले की सभी जांच पूरी हो चुकी हैं। दूसरी एसआईटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किस स्तर पर कार्रवाई होती है और किन लोगों की जिम्मेदारी तय की जाती है।
क्या है पूरा मामला?
राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित चोरी के आरोप सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया था। आरोपों को लेकर मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों पर सवाल उठाए गए और विपक्ष ने इसे राजनीतिक मुद्दा भी बनाया। जांच के लिए एसआईटी गठित की गई। अब एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल मामले में आठ लोगों के नाम एसआईटी की रिपोर्ट में होने और उनके पहले ही गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई है, जबकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली दूसरी एसआईटी की जांच जारी है।





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