7 हजार शाखाओं में कामकाज ठप, 42 हजार कर्मचारी-अधिकारी रहे हड़ताल पर; पांच दिनी कार्य सप्ताह लागू करने की मांग
दैनिक इंदौर संकेत | इंदौर
इंदौर। पांच दिनी कार्य सप्ताह लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की देशव्यापी हड़ताल का मध्यप्रदेश में भी व्यापक असर देखने को मिला। बैंक हड़ताल के चलते प्रदेश में करीब 5,500 करोड़ रुपये का दैनिक बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ। प्रदेश की कुल 8,707 बैंक शाखाओं में से करीब 7,000 शाखाओं में कामकाज पूरी तरह या आंशिक रूप से ठप रहा। इससे आम ग्राहकों के साथ-साथ कारोबारियों और विभिन्न संस्थानों को भी बैंकिंग सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
मध्यप्रदेश बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के अनुसार, प्रदेशभर में करीब 42 हजार बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल रहे। हड़ताल के कारण बैंकों में नियमित कामकाज प्रभावित हुआ और कई शाखाओं में ग्राहक सेवा से जुड़े कार्य नहीं हो सके।
नकद लेन-देन से लेकर चेक क्लियरेंस तक प्रभावित
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर रोजमर्रा की बैंकिंग सेवाओं पर पड़ा। कई शाखाओं में नकद जमा और निकासी, चेक क्लियरेंस, एफडी से जुड़े कार्य, एफडी नवीनीकरण और सरकारी कोषागार से संबंधित बैंकिंग कार्य प्रभावित रहे। बैंक शाखाओं में कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण ग्राहकों को अपने जरूरी काम अगले कार्यदिवस तक टालने पड़े। हालांकि डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम जैसी सेवाएं कई जगह उपलब्ध रहीं, लेकिन शाखा स्तर पर होने वाले कार्यों के प्रभावित होने से ग्राहकों को परेशानी हुई। कारोबारियों के लिए भी चेक और नकद लेन-देन से जुड़े काम प्रभावित होने के कारण दैनिक कारोबार पर असर पड़ा।
12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी शामिल
बैंक कर्मचारियों के संगठनों के मुताबिक हड़ताल में 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी शामिल रहे। इसके अलावा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल का समर्थन किया। इसके चलते प्रदेश के कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाओं का संचालन प्रभावित रहा। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में बैंक कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन भी किया। कर्मचारियों ने सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।
पांच दिनी कार्य सप्ताह लागू करने पर जोर
मध्यप्रदेश बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहनकृष्ण शुक्ला ने कहा कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से पांच दिनी कार्य सप्ताह लागू करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है और आधुनिक तकनीक के बावजूद कर्मचारियों पर काम का बोझ अधिक है। ऐसे में सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग कार्य और दो दिन अवकाश की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांग है कि पांच दिनी कार्य सप्ताह को तत्काल लागू किया जाए, ताकि कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिल सके और काम करने की क्षमता भी बढ़े।
पेंशन व्यवस्था में सुधार की भी मांग
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने केवल पांच दिनी कार्य सप्ताह ही नहीं, बल्कि पेंशन से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। कर्मचारी संगठनों ने पेंशन लाभों में सुधार करने की मांग की। इसके साथ ही सभी पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते की गणना की समान व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई। कर्मचारियों का कहना है कि पेंशन से जुड़े नियमों में समानता और पारदर्शिता जरूरी है, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके अधिकारों का उचित लाभ मिल सके।

एनपीएस कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का विकल्प देने की मांग
बैंक कर्मचारियों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प देने की मांग भी उठाई। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है और पेंशन व्यवस्था में पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैंकिंग सेवाओं पर पड़ा सीधा असर
एक दिन की हड़ताल के कारण बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े कई काम प्रभावित हुए। बैंक शाखाओं में होने वाले लेन-देन के अलावा व्यापारिक भुगतान, चेक से जुड़े कार्य और सरकारी कोषागार से संबंधित बैंकिंग गतिविधियां भी प्रभावित रहीं। बैंक कर्मचारियों के संगठनों ने इसे अपनी मांगों के समर्थन में किया गया आंदोलन बताते हुए कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आगे भी आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। बैंक संगठनों के अनुसार, हड़ताल के जरिए सरकार और बैंक प्रबंधन का ध्यान कर्मचारियों की लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना उद्देश्य था। वहीं, बैंकिंग सेवाओं के प्रभावित होने से आम ग्राहकों और कारोबारियों को एक दिन के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा।
कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि पांच दिनी कार्य सप्ताह, पेंशन सुधार और एनपीएस कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का विकल्प देने समेत अन्य मांगों पर ठोस निर्णय होने तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है।




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