इंदौर। चुनाव आते ही कांग्रेस को सबसे ज्यादा जिस कमी का अहसास होता है, अब पार्टी उसी कमजोरी को दूर करने में जुट गई है। नेताओं की बैठकों और बड़े आयोजनों से आगे बढ़कर कांग्रेस ने अब अपना पूरा फोकस बूथ की राजनीति पर कर दिया है। आगामी नगरीय निकाय चुनाव को पार्टी ने संगठन की जमीनी ताकत परखने का मौका मानते हुए हर बूथ पर अपना नेटवर्क खड़ा करने की कवायद शुरू कर दी है।
शहर कांग्रेस ने तय किया है कि प्रत्येक बूथ पर एक अध्यक्ष, एक बूथ प्रभारी और एक महिला प्रभारी नियुक्त किया जाएगा। खास बात यह है कि समितियां गठित करने के बाद मामला सिर्फ नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस के बड़े नेता इन पदाधिकारियों से सीधे संपर्क करेंगे और बूथ-पहुंचकर हर स्तर पर बूथ की वास्तविक स्थिति जानेंगे।
दरअसल, कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती यही रही है कि चुनाव के दौरान पार्टी का संगठन कागजों और बैठकों में तो सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन मतदान केंद्र तक पहुंचते-पहुंचते उसकी ताकत कमजोर पड़ जाती है। भाजपा के मुकाबले बूथ मैनेजमेंट में पिछड़ना कांग्रेस के लिए लगातार चिंता का विषय रहा है। अब पार्टी इसी अंतर को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने भी बूथ समितियों को प्राथमिकता देते हुए विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-2 में खुद बैठकों की कमान संभाल ली है। बैठकों में बूथ स्तर पर जिम्मेदारियां तय करने और स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर दिया जाएगा।
कांग्रेस ने इस बार बूथ समितियों में महिलाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की रणनीति बनाई है। प्रत्येक बूथ पर महिला प्रभारी की नियुक्ति के पीछे पार्टी की कोशिश महिला मतदाताओं से सीधा संपर्क बढ़ाने की है। इसके अलावा वार्ड स्तर के पदाधिकारियों से वन-टू-वन चर्चा कर यह भी पता लगाया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने में सबसे बड़ी अड़चन क्या है।
नगरीय चुनाव होगा ‘टेस्ट मैच’, नजर 2028 पर
कांग्रेस की इस पूरी कवायद को सिर्फ नगरीय निकाय चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा है। पार्टी बूथ समितियों के जरिए ऐसा संगठनात्मक नेटवर्क तैयार करना चाहती है, जो 2028 के विधानसभा चुनाव तक लगातार सक्रिय रहे। यानी निकाय चुनाव केवल एक प्री-मैनेजमेंट का टेस्ट रहेगा और इसी के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
अब चुनौती सिर्फ समितियां बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें चुनाव तक सक्रिय रखने की है। कांग्रेस अगर इस बार बूथ स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने में सफल रहती है तो आने वाले चुनावों में उसे इसका फायदा मिल सकता है। वरना पहले की तरह कागजों पर मजबूत संगठन और मतदान केंद्र पर कमजोर पकड़ का सवाल फिर खड़ा होगा।
इनका कहना है
“कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए पार्टी अब बूथ प्रभारी, बूथ समिति और पन्ना प्रभारी की व्यवस्थाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करेगी।”
— चिंटू चौकसे, शहर कांग्रेस अध्यक्ष
“संगठन सृजन के तहत पार्टी अब अपनी कोर इकाई को मजबूत करने के लिए बूथ प्रबंधन को लेकर ब्लूप्रिंट बना रही है। इसका फायदा आने वाले नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी संगठन को मिलेगा।”
— अमित चौरसिया, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस




Total Users : 24252
Leave a comment