जबलपुर में एक प्रशासनिक विवाद सत्ता, सिस्टम और साख की लड़ाई में बदल गया है। महिला कर्मचारी को फटकार से शुरू हुआ यह मामला अच पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह और जबलपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ, आईएएस अरविंद शाह के बीच टकराव की शक्ल ले चुका है। इस मामले की खबर सामने आते ही प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। अब पर्दे के पीछे डैमेज कंट्रोल जारी है, लेकिन इस कोशिश में किसे बचाया जा रहा है और किसे बलि का बकरा बनाया जा रहा है, यही इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल है।

27 अप्रैल को जैसे ही ‘मंत्री राकेश सिंह ने आईएएस को धमकाया’ वाली खबर ने मध्यप्रदेश में हल्ला मच गया। उसी दिन भोपाल में विधानसभा का विशेष सत्र चल रहा था, तब आईएएस एसोसिएशन के सदस्य मंत्री राकेश सिंह से मिलने विधानसभा पहुंच गए। मंत्री ने वहां अपना पक्ष रखा। बोले, मामला जैसा दिखाया जा रहा है, वैसा नहीं है। उन्होंने अरविंद शाह पर महिला कर्मचारी से दुर्व्यवहार का आरोप दोहराया। इस मुलाकात के बाद घटनाक्रम तेजी से पलटने लगा। सूत्र बताते हैं कि कुछ ही घंटों बाद रात करीब 8 बजे आईएएस एसोसिएशन के सदस्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने पहुंचे। दिलचस्प बात यह रही कि मुख्यमंत्री अपने साथ मंत्री राकेश सिंह को भी लेकर पहुंच गए। इस बैठक में जो चर्चा हुई, उसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। सूत्रों के अनुसार, बैठक में आईएएस अरविंद शाह के व्यवहार पर सवाल उठाए गए। उन्हें मूडी अफसर बताया गया। उनके कामकाज की जांच को बात कही गई। वहीं, महिला कर्मचारी की उपस्थिति को लेकर भी अलग- अलग तर्क दिए गए। एक तरफ कहा गया कि वह नियमित ऑफिस आती थीं और ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज है। वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा गया कि वह सिर्फ थंब लगाकर चली जाती थीं। कुल मिलाकर, बैठक का नतीजा यह निकला कि किसी तरह इस मामले को शांत किया जाए। यह काम आईएएस एसोसिएशन को सौंपा गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे ज्यादा सवाल एमपी आईएएस एसोसिएशन की भूमिका पर उठ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कई आईएएस अधिकारी अंदर ही अंदर नाराज हैं। वे मंत्री के व्यवहार को गलत मानते हैं और अब एसोसिएशन के रवैये से खुश नहीं हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि इस मामले में आईएएस लॉबी कमजोर साबित हुई है। तुलना आईपीएस एसोसिएशन से की जा रही है, जहां दूसरे मामले में आईपीएस आयुष जाखड़ के समर्थन में आईपीएस एसोसिएशन ने खुलकर मोर्चा संभाला था। इसके बाद विधायक प्रीतम लोधी को माफी मांगनी पड़ी थी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अरविंद शाह अब सिस्टम में अकेले पड़ गए हैं एक दिन पहले तक जो एसोसिएशन उनके समर्थन में था, अब उसने करीब-करीब पल्ला झाड़ लिया है। हालांकि, कई युवा आईएएस और मैदानी कलेक्टर अरविंद शाह के समर्थन में हैं। वे खुलकर सामने तो नहीं आ रहे, लेकिन आपस में चर्चा कर रहे हैं और अपना समर्थन जता रहे हैं। दिल्ली स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई सामने आने को तैयार नहीं है। कई अफसरों से बात की, पर किसी ने ऑन रिकॉर्ड कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
पर्दे के पीछे का दबाव
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, उसी रात आईएएस एसोसिएशन की ओर से अरविंद शाह को फोन किया गया। बातचीत में उनसे कहा गया कि वे राजीनामा करते हुए विवाद खत्म करें, पर शाह ने साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब उन्होंने गलत किया ही नहीं तो वे समझौता क्यों करें? इसके बाद दबाव बढ़ाया गया। उनसे कहा गया कि वे मंत्री के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और मीडिया में चल रही खबरों को भ्रामक बताएं। शाह ने ऐसा करने से भी मना कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद उनसे कहा गया कि महिला कर्मचारी ने शपथ पत्र दिया है और उनके खिलाफ एफआईआर हो सकती है। इस पर शाह का जवाब भी उतना ही सख्त था। बोले, यदि उनके खिलाफ एफआईआर होती है तो वे भी रिपोर्ट दर्ज कराएंगे।





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