कुलपति इवेंट्स और साइकिलिंग में व्यस्त, पढ़ाई-रिसर्च हाशिए पर !
शहर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में इन दिनों शैक्षणिक माहौल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। छात्रों और कुछ शिक्षकों का आरोप है कि कुलपति प्रो. राकेश सिंघाई के कार्यकाल में विश्वविद्यालय की अकादमिक छवि कमजोर पड़ती जा रही है। कैंपस में इवेंट्स और प्रचारात्मक गतिविधियों की भरमार है, लेकिन पढ़ाई, परीक्षा
प्रबंधन और रिसर्च को लेकर ठोस पहल नजर नहीं आ रही।
रिसर्च के नाम पर आंकड़ों की बाजीगरी ?
शोधार्थियों का आरोप है कि रिसर्च प्रोजेक्ट्स और पब्लिकेशन के आंकड़े तो पेश किए जाते हैं, लेकिन नई रिसर्च ग्रांट्स लाने और उद्योग अकादमिक सहयोग बढ़ाने में ठोस परिणाम नहीं दिख रहे।
कई पीएचडी स्कॉलर्स को गाइड और फंडिंग संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासनिक फैसलों पर भी सवाल
कुछ फैकल्टी सदस्यों का कहना है कि महत्वपूर्ण पदों पर निक्तियों और समितियों के गठन में पारदर्शिता की कमी रही है। वहीं परीक्षा परिणामों में देरी और तकनीकी खामियों ने विश्वविद्यालय की साख को चोट पहुंचाई है।
यह कुलपति राकेश सिंघई के गलत निर्णयों का ही परिणाम है कि शहर के प्रतिष्ठित माने जानेवाले डीएवीवी में बीते एक साल से हॉस्टलों का माहौल सवालों के घेरे में है। रैगिंग और जूनियर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार और अब तो यौन शोषण की शिकायतों में बढ़ोतरी ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर उंगली उठा दी है।
छात्र संगठनों का आरोप है कि यह सब कुलपति स्तर पर मॉनिटरिंग और सख्ती की कमी का नतीजा है।
हॉस्टल में डर का माहौल ?
नए प्रवेश लेने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। कुछ मामलों में रात के समय जबरन परिचय, मानसिक दबाव और अभद्र व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि कई छात्र खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।
एक प्रथम वर्ष के छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘हमें कहा जाता है कि शिकायत मत करो, वरना आगे और परेशान किया जाएगा।’
क्लास कम, कार्यक्रम ज्यादा ?
छात्रों का कहना है कि विभागों में नियमित कक्षाओं की मॉनिटरिंग कमजोर हुई है। कई कोर्सेस में गेस्ट फैकल्टी के भरोसे पढ़ाई चल रही है। सेमेस्टर कैलेंडर बार-बार खिसकने से विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है। एक छात्र नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘कैंपस में साइकिल रैली और इवेंट्स की तस्वीरें ज्यादा दिखती हैं, लेकिन लैब और लाइब्रेरी की हालत पर ध्यान कम है।





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