Home ताज़ा ख़बर एसआईआर ने दोनों पार्टी को पशोपेश में डाला
ताज़ा ख़बरदेश-प्रदेशराजनीति

एसआईआर ने दोनों पार्टी को पशोपेश में डाला

इंदौर संकेत प्रतिनिधि

भोपाल । एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन)के बाद जारी किए गए मतदाताओं के आंकड़ों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों को पसोपेश में डाल दिया है। दोनों पार्टियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर कार्यक्रम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के नाम पर आम मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है और बड़ी संख्या में पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका बन गई है। वहीं भाजपा ने भी आयोग के सामने अपनी बात रखी है।


कांग्रेस अब दस्तावेजों के साथ भारत निर्वाचन आयोग में शिकायत करने जा रही है। पार्टी ने हर जिले से रिपोर्ट मांगी है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार नाम काटने वाले फॉर्म सात में भारी अनियमितता के आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि प्रिंटेड फॉर्म लिए गए, जो नहीं लिए जा सकते थे। उधर, भाजपा ने स्थायी रूप से स्थानांतरित 22 लाख से अधिक मतदाताओं को अवसर न देने और 20 लाख लोगों के नाम न जुड़ पाने का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा को ज्ञापन दिया है। प्रदेश में एसआईआरके अंतर्गत गणना पत्रक जमा कराने के साथ दावा-आपत्ति का चरण पूरा हो चुका है। अब इनका निराकरण किया जाएगा और फिर 21 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी हुई है। जो नाम काटे गए, उनमें से कई के दोबारा आवेदन जमा कराए गए हैं। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन अधिकारियों पर दबाव बनाकर प्रिंटेड फार्म जमा किए हैं, जबकि ऐसा करने पर जिला निर्वाचन अधिकारी नागांव (असम) ने गलत फार्म-सात के आधार पर की जा रही समस्त प्रक्रिया को निरस्त किया है। रायसेन सहित अन्य जिले में एक ही व्यक्ति ने 200-200 आपत्तियां दर्ज कराईं। एक-एक व्यक्ति ने डेढ़-डेढ़ सौ फार्म जमा किए हैं, जबकि एक दिन में एक बूथ लेवल कार्यकर्ता 15 फार्म जमा कर सकता है। उन मतदाताओं को भी त्रुटि के नाम पर नोटिस दिए गए हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जानकारी गणना पत्रक में दी थी। कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि सभी जिला मुख्यालयों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
इनकी रिपोर्ट जिला पदाधिकारियों से मांगी गई है। विधिक परामर्श भी ले रहे हैं और भारत निर्वाचन आयोग को ज्ञापन भी दिया जाएगा।


उधर, प्रदेश भाजपा ने भी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि 31 लाख मतदाताओं के नाम अनुपस्थित और स्थायी रूप से स्थानांतरित की श्रेणी में डालकर प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए गए। किसी को भी अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। इनमें से कई मतदाता उपलब्ध हैं और इन्हें फिर से नाम जुड़वाने के लिए प्रक्रिया करनी पड़ रही है। जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार लगभग 20 लाख मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए। प्रक्रियात्मक त्रुटि के नाम पर भी मतदाताओं को नोटिस दिए गए हैं, जिससे वे परेशान हो रहे हैं। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि हमारे बूथ लेवल एजेंटों ने नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करवाए हैं।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Our Visitor

009792
Total Users : 9792

Related Articles

ताज़ा ख़बरदेश-प्रदेशपुलिस विभाग

रावजी बाजार में आगजनी करने वाला बदमाश गिरफ्तार, निकला जुलूस

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में एक बार फिर असामाजिक...