सीईओ के निर्देश से ज्यादा डर हुआ हावी
इंदौर के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में सीईओ जिला पंचायत सिद्धार्थ जैन के निर्देश बेअसर साबित हो रहे है। कहने को तो सीईओ ने शिक्षा विभाग ने अनेक नवाचार शुरू किए और विभाग में सूचित लाने का प्रयास जरूर किया लेकिन उनकी मंशा और सदप्रयास डाइट में आकर पूरी तरह से ध्वस्त किए जा रहे है। उन्होंने वर्तमान प्राचार्य शुक्ला को स्पष्ट तौर निर्देशित किया था कि जब तक शासन के स्पष्ट आदेश नहीं आ जाते तब तक मंगलेश व्यास निलंबित रहेंगे और उन्हें केवल निर्वाह भत्ता की पात्रता रहेगी। अभी उन्हें डाइट प्राचार्य का प्रभार देने की आवश्यकता नहीं है। डाइट प्राचार्य ने डाइट के प्रभार को लेकर सीईओ का आदेश माना लेकिन इसे विडम्बना कहे कि आज भी डाइट प्राचार्य की कुर्सी पर निलंबित मंगलेश व्यास ही बेशर्मी से बैठते है। सूत्रों के अनुसार मंगलेश व्यास ने कार्यालय में डर का माहौल बनाकर रखा है और झाकी बाजी करते रहते है। इसी के प्रभाव में आकर डाइट प्राचार्य शुक्ला अपनी कुर्सी पर बैठने की बजाय एक छोटे से कमरे में बैठकर अपने पदीय दायित्वों को पूरा कर रही है। बेशर्मी की इंतहा देखिए कि डाइट प्राचार्य पद से निलम्बित हुए मंगलेश व्यास सार्वजनिक आयोजनों में अभी भी अपने आपको डाइट प्राचार्य कहते है।
गौरतलब है कि डीईओ कार्यालय में भ्रष्टाचार की नई इबारत लिखने वाले मंगलेश व्यास डाइट प्राचार्य रहते निलंबित हो गए थे। 90 दिन के पश्चात आरोप पत्र नही लने मिलने के चलते अपने आपको स्वमेव ही बहाल समझकर डाइट प्राचार्य की कुर्सी पर जमकर बैठ गए। लेकिन सीईओ जिला पंचायत सिद्धार्थ जैन ने उन्हें इसका पदभार देने से इनकार कर दिया। मिलने के चलते अपने आपको स्वमेव ही बहाल समझकर डाइट प्राचार्य की कुर्सी पर जमकर बैठ गए। लेकिन सीईओ जिला पंचायत सिद्धार्थ जैन ने उन्हें इसका पदभार देने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद भी डाइट प्राचार्य शुक्ला ने सीईओ के निर्देश को मानते हुए पर अपनी कुर्सी पर एक निलंबित को बैठने दिया यह साफ साफ दर्शाता है कि अपने वरिष्ठ अधिकारी सीईओ के निर्देश को मानने की बजाय एक निलंबित को अपनी कुर्सी पर किसी डर के कारण बेठा रहे हे
डीएम तकनीकी तौर पर अभी भी जेडी अटैच अगर तकनीकी तौर पर देखा जाए तो निलम्बित मंगलेश व्यास अभी भी इंदौर संभाग संयुक्त संचालक लोक शिक्षण(जेडी) में अटैच है। विदित है कि उनके निलंबन आदेश में उनका मुख्यालय जेडी ही था लेकिन अपने अपने विभागीय नियमों से परे समझने वाले निलम्बित व्यास ने बिना किसी आदेश के डाइट प्राचार्य की कुर्सी पर बैठना शुरू कर दिया। इस मामले में जितने दोषी निलम्बित मंगलेश व्यास है उतने ही दोषी डाइट प्राचार्य शोभा शुक्ला भी है





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