22-23 भुगतान कैंसिल होने के बाद खुला था राज, पांच खातों में मिली गड़बड़ी; 15 हजार से ज्यादा कर्मचारियों के बैंक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
इंदौर। नगर निगम में सामने आए वेतन घोटाले के बाद निगम प्रशासन ने अब कर्मचारियों के बैंक खातों और सर्विस रिकॉर्ड के सत्यापन का अभियान शुरू कर दिया है। निगम के 22 जोन कार्यालयों सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत 15 हजार से अधिक कर्मचारियों के बैंक खातों की जानकारी का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों से बैंक पासबुक और खातों से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है, ताकि निगम के रिकॉर्ड में दर्ज खाते और जिस बैंक खाते में वास्तव में वेतन जमा हो रहा है, उसका मिलान किया जा सके।
बैंक खातों के साथ सर्विस रिकॉर्ड की भी जांच
वेतन भुगतान में गड़बड़ी सामने आने के बाद निगम प्रशासन अब केवल बैंक खातों की जानकारी तक सीमित नहीं रहना चाहता। कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड का भी मिलान किया जा रहा है। रिकॉर्ड में कर्मचारी का नाम, पद, विभाग, बैंक खाता और वेतन भुगतान से जुड़ी जानकारी की जांच की जा रही है। इसके अलावा कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन भी कराया जा रहा है, ताकि रिकॉर्ड में दर्ज कर्मचारी और वास्तविक रूप से कार्यरत कर्मचारी की स्थिति स्पष्ट हो सके।
निगम प्रशासन की ओर से बैंक से भी खातों से संबंधित जानकारी का फीडबैक लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि निगम के रिकॉर्ड में दर्ज बैंक खाता सही कर्मचारी से जुड़ा है या नहीं और उसी खाते में संबंधित कर्मचारी का वेतन जमा हो रहा है या नहीं।
22-23 भुगतान कैंसिल होने से सामने आई गड़बड़ी
दरअसल जून का वेतन जुलाई में जारी करने की प्रक्रिया के दौरान एक साथ 22-23 भुगतान बैंक से कैंसिल हो गए थे। भुगतान कैंसिल होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू की गई। इसकी जानकारी लेखा विभाग के अपर आयुक्त (राजस्व) देवधर दरवई को दी गई। जांच के दौरान बैंक डिटेल और निगम के रिकॉर्ड में दर्ज कर्मचारी की जानकारी में अंतर सामने आया। इसके बाद संबंधित 22-23 खातों की पड़ताल की गई। जांच आगे बढ़ी तो पांच खातों में गड़बड़ी सामने आने की बात सामने आई।

अब बड़े स्तर पर होगी जांच
पांच खातों में गड़बड़ी सामने आने के बाद निगम प्रशासन ने पूरे रिकॉर्ड की जांच कराने का फैसला लिया है। इसी के तहत सभी जोन और विभागों के कर्मचारियों के बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का प्रयास है कि सत्यापन के दौरान यदि किसी अन्य कर्मचारी के खाते या रिकॉर्ड में भी विसंगति मिलती है तो उसे समय रहते सामने लाया जा सके। वेतन घोटाले के बाद शुरू किए गए इस सत्यापन अभियान को निगम प्रशासन की बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। अब जांच में यह भी स्पष्ट होगा कि बैंक खातों और कर्मचारियों के रिकॉर्ड में सामने आई गड़बड़ियां केवल तकनीकी या रिकॉर्ड संबंधी हैं अथवा इनके पीछे किसी तरह की अनियमितता हुई है।
रिकॉर्ड की खामियां दूर करने पर जोर
निगम प्रशासन द्वारा कर्मचारियों से बैंक पासबुक सहित जरूरी जानकारी मांगे जाने के बाद रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि बैंक खाते और कर्मचारी के सर्विस रिकॉर्ड का सही मिलान होना जरूरी है, ताकि भविष्य में वेतन भुगतान के दौरान किसी तरह की परेशानी या गड़बड़ी न हो। फिलहाल 15 हजार से अधिक कर्मचारियों के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाना है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने खातों में गड़बड़ी है और वेतन भुगतान से जुड़ी अनियमितता का वास्तविक दायरा कितना है।






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