दोषी कर्मचारियों के साथ बाहरी लोगों पर भी होगी एफआईआर
इंदौर। नगर निगम के बहुचर्चित नामांतरण घोटाले में अब जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। करोड़ों रुपये की संपत्तियों के रिकॉर्ड में हुई कथित हेराफेरी के बाद निगम प्रशासन ने न सिर्फ राजस्व विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है, बल्कि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकने के लिए नामांतरण प्रक्रिया में पहली बार ओटीपी आधारित सत्यापन प्रणाली भी लागू कर दी है।
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच पूरी होते ही दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों और इस पूरे खेल में शामिल बाहरी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। जांच में अब तक सामने आया है कि कई नामांतरण अधिकारियों की लॉगिन आईडी का उपयोग कर देर रात ऑनलाइन किए गए थे। इस कारण अब जांच को तकनीकी स्तर तक ले जाया गया है।
निगम का मानना : प्रशासनिक लापरवाही नहीं
नगर निगम का मानना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। इसलिए जांच को आईटी विशेषज्ञों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। आयुक्त क्षितिज सिंघल ने दोटूक कहा है कि जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ केवल एफआईआर दर्ज होगी, बल्कि विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। इस घटना ने शहर के करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन निगम का दावा है कि नई व्यवस्था के बाद भविष्य में इस तरह की हेराफेरी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
आईटी एक्सपर्ट भी जुड़े
मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के दो आईटी विशेषज्ञ जांच समिति के साथ जुड़े हैं, जो यह पता लगाएंगे कि अधिकारियों की आईडी का इस्तेमाल किसने किया, सिस्टम में किस तरह प्रवेश मिला और फर्जी नामांतरण कैसे किए गए। निगम के अनुसार अब तक 375 संपत्तियों के रिकॉर्ड में की गई गड़बड़ियों को सुधारा जा चुका है। जिन संपत्तियों के मूल मालिकों के नाम हटाकर दूसरे नाम दर्ज किए गए थे, उन्हें फिर से बहाल किया जा रहा है। वहीं जिन संपत्तियों का नामांतरण कर आगे बिक्री भी कर दी गई, उनके रिकॉर्ड की भी अलग से जांच की जा रही है। संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है, हालांकि अधिकांश लोगों का कहना है कि उन्हें स्वयं इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर संपत्ति कब और कैसे दर्ज कर दी गई।
प्रक्रिया में किया बदलाव
इस पूरे मामले के बाद निगम ने नामांतरण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए ओटीपी सिस्टम लागू कर दिया है। अब किसी भी संपत्ति का नामांतरण तभी आगे बढ़ सकेगा, जब पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी का सत्यापन होगा। इससे किसी की आईडी या दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी नामांतरण करना लगभग असंभव हो जाएगा।




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