इंदौर। नगर निगम राजनीति में वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद जीतू यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब आठ महीने तक पार्टी से बाहर रहने के बाद 18 अगस्त को उनकी भाजपा में वापसी तो हो गई, लेकिन उन्हें अब तक मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) में शामिल नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि इसी बात को लेकर जीतू यादव की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया प्रोफाइल से भाजपा का नाम और पार्टी का चुनाव चिन्ह हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जीतू यादव और भाजपा के बीच दूरी की खबरों को उस समय और बल मिला, जब उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल में बदलाव दिखाई दिया। पहले जहां वह स्वयं को भाजपा पार्षद के रूप में प्रस्तुत करते थे, वहीं अब उनकी प्रोफाइल में केवल वार्ड 24 पार्षद लिखा नजर आ रहा है। पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी हटा दिया गया है। इसके साथ ही उनकी प्रोफाइल पर जय भीम, जय भारत और जय गुरु रविदास जैसे संदेश प्रमुखता से दिखाई दे रहे हैं।
18 अगस्त को हुई थी भाजपा में वापसी
गौरतलब है कि वार्ड 24 के पार्षद जीतू यादव को जनवरी 2025 में एक विवाद के बाद भाजपा ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। उस समय उनका मेयर इन काउंसिल का पद भी चला गया था। इसके बाद लंबे समय तक वह पार्टी की मुख्य गतिविधियों से दूर रहे।
करीब आठ महीने बाद भाजपा ने उन्हें वापस पार्टी में शामिल कर लिया। 18 अगस्त 2026 को उनकी पार्टी में वापसी हुई। हालांकि, वापसी के साथ ही उन्हें एमआईसी में दोबारा शामिल नहीं किया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जीतू यादव की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यही है।
वापसी के दिन ही दूसरे पार्षद को मिला विभाग
सूत्रों के अनुसार, जीतू यादव की भाजपा में वापसी के दिन ही उनके पुराने विभाग से संबंधित जिम्मेदारी दूसरे पार्षद को सौंप दी गई। बताया जा रहा है कि पहले जीतू यादव के पास कुछ महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी, जो उनके निष्कासन के बाद महापौर के पास चली गई थी। बाद में यह जिम्मेदारी एमआईसी सदस्य नीरज सिंह चौहान को दे दी गई।
इसे लेकर भी जीतू यादव की नाराजगी सामने आने की चर्चा है। राजनीतिक हलकों में इसे साफ संकेत माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल उन्हें पहले जैसी जिम्मेदारियां देने के मूड में नहीं है।
नगराध्यक्ष से भी विवाद की चर्चा
भाजपा में वापसी के बाद जीतू यादव और नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा के बीच भी मतभेद होने की चर्चाएं सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी में उनकी भूमिका और आगे की जिम्मेदारियों को लेकर दोनों के बीच बातचीत के दौरान मतभेद की स्थिति बनी।
हालांकि, इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार जीतू यादव पार्टी नेतृत्व से अपेक्षित सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिलने से संतुष्ट नहीं हैं।
सोशल मीडिया से भाजपा की पहचान हटाना बना चर्चा का विषय
जीतू यादव की सोशल मीडिया प्रोफाइल में किया गया बदलाव अब राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। पहले उनकी पहचान के साथ भाजपा पार्षद और पार्टी से जुड़ी जानकारी दिखाई देती थी, लेकिन अब वहां पार्टी का नाम और चिन्ह नजर नहीं आ रहा है।
जब उनसे इस संबंध में सवाल किया गया तो जीतू यादव ने खुद को पार्टी का ही कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से पार्टी के साथ हैं। हालांकि सोशल मीडिया से भाजपा का नाम और चुनाव चिन्ह हटाने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से बचने की कोशिश की।
विधायक मालिनी गौड़ भी थीं वापसी के खिलाफ!
पार्टी सूत्रों की मानें तो जीतू यादव की भाजपा में वापसी को लेकर संगठन के भीतर एकमत राय नहीं थी। बताया जाता है कि क्षेत्रीय विधायक मालिनी गौड़ भी उनकी वापसी के पक्ष में नहीं थीं। वहीं वार्ड 65 के पार्षद कमलेश काला ने भी पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर जीतू यादव को वापस पार्टी में शामिल करने पर आपत्ति जताई थी।
जीतू यादव और कमलेश काला के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। दोनों पार्षदों के बीच मतभेद पहले भी सार्वजनिक रूप से सामने आ चुके हैं। जनवरी 2025 में हुए विवाद के बाद ही जीतू यादव पर पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी।
संभागीय प्रभारी की बैठक के बाद बदले समीकरण
सूत्रों के अनुसार हाल ही में भाजपा के संभागीय प्रभारी रवींद्र रावत इंदौर आए थे। इस दौरान उन्होंने महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा सहित पार्टी के अन्य नेताओं से चर्चा की। बताया जा रहा है कि बैठक में जीतू यादव की पार्टी में भूमिका और एमआईसी में शामिल किए जाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
सूत्रों का दावा है कि पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल जीतू यादव को एमआईसी में शामिल नहीं करने का निर्णय लिया है। यही वजह है कि भाजपा में वापसी के बावजूद उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिली है।
भोपाल में हुई थी नेताओं से मुलाकात
जीतू यादव की भाजपा में वापसी के दौरान कई नेता भोपाल में मौजूद थे। जानकारी के अनुसार विधायक गोलू शुक्ला, नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी में पार्टी स्तर पर उनकी वापसी की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके बाद यह माना जा रहा था कि जीतू यादव की राजनीतिक स्थिति फिर से मजबूत होगी और उन्हें जल्द ही निगम की राजनीति में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।
लेकिन वापसी के बाद एमआईसी में जगह नहीं मिलने और पुराने विभागों की जिम्मेदारी दूसरे नेताओं को दिए जाने से समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
क्या भाजपा से फिर बढ़ेगी दूरी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जीतू यादव केवल नाराज हैं या उनकी नाराजगी आगे चलकर भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है। फिलहाल उन्होंने पार्टी छोड़ने जैसी कोई बात नहीं कही है और स्वयं को भाजपा से जुड़ा बताया है। लेकिन सोशल मीडिया से पार्टी की पहचान हटाना और लगातार जिम्मेदारियों से दूर रखा जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
नगर निगम की राजनीति में जीतू यादव की सक्रियता और वार्ड में उनके समर्थकों की संख्या को देखते हुए भाजपा नेतृत्व भी इस मामले को नजरअंदाज नहीं कर सकता। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व और जीतू यादव के बीच संबंध किस दिशा में जाते हैं, इस पर इंदौर की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
फिलहाल इतना तय है कि भाजपा में वापसी के महज कुछ दिनों बाद ही जीतू यादव की नाराजगी ने इंदौर की नगर निगम राजनीति में एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।





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