देपालपुर। गौतमपुरा नगर और आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों ने अपनी दुकानदारी जमा रखी है। गौतमपुरा नगर की बात करें तो 25 से ज्यादा अवैध क्लिनिक संचालित हो रहे हैं। गांव में देखा जाए तो दो से अधिक क्लिनिक प्रत्येक गांव में दिखाई दे रहे हैं।
जानकारी में आपको बता दें झोलाछाप डॉक्टरों के पास ना तो डिग्री है, ना परमिशन। इसके बावजूद भी खुलेआम धड़ल्ले से आम जनता का इलाज कर रहे हैं। जहां दवाई-गोली से ठीक होने वाले मरीज उन्हें अपने फायदे के लिए बोतल और इंजेक्शन लगाई जा रही है, जिसकी परमिशन झोलाछाप डॉक्टरों के पास नहीं है।
डॉक्टर इलाज के साथ-साथ मेडिकल भी संचालित कर रहे हैं। हमारे क्लीनिक से इलाज कराओ और हमारी ही दुकान से दवाइयां खरीदो, कई बार देखने में आया है। मरीज को हाई पावर दवाइयां दी जा रही हैं, जहां 200 से 250 एमजी की दवाइयों में काम होता, वहीं जल्दी ठीक करने के चक्कर में 500 एमजी से लेकर 600 एमजी तक की दवाई का उपयोग झोलाछाप डॉक्टर कर रहे हैं। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि झोलाछाप डॉक्टर मरीज की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। हाई पावर की दवाइयों और इंजेक्शन से पहले भी क्षेत्र में कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के नाम पर केवल खाना पूर्ति करने आते हैं। आयुर्वेद का कोर्स कर एलोपैथिक के इलाज का व्यापार बड़े पैमाने पर गौतमपुरा में चल रहा है। इतना ही नहीं, क्षेत्र के कुछ झोलाछाप डॉक्टर मेडिकल भी संचालित कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल
देपालपुर स्वास्थ्य विभाग पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिम्मेदार अधिकारी क्षेत्र से गायब हैं। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर विभा नागर कम अनुभव के चलते क्षेत्र में कार्रवाई नहीं कर पातीं। देपालपुर स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति के बाद अब तक इनके द्वारा क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि नागर का अनुभव बेहद कमजोर है। वह अभी स्वास्थ्य विभाग के कार्य को समझ रही हैं। लेकिन इसका फायदा क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं। देपालपुर स्वास्थ्य विभाग में अनुभवी अधिकारियों की आवश्यकता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी झोलाछाप डॉक्टरों पर क्या कार्रवाई करते हैं।





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