इंदौर। प्रदेश सरकार ने जहां एक और सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को टैक्स फ्री कर दिया है। इसको लेकर अध्यादेश भी जारी कर दिया गया है। यह एक बड़ा फैसला कैबिनेट में लिया गया है लेकिन यदि नगर निगम इंदौर की बात की जाए तो नगर निगम को बॉन्ड निकालने पर ऊंचे ब्याज का फटका लग रहा है, जिसको लेकर अधिकारी मंथन कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बॉन्ड तभी फायदेमंद हो सकता है जब यह कम ब्याज दर पर मिले, लेकिन इसके विपरीत निगम में सक्रिय बिचौलिये ऊंचे ब्याज पर बॉन्ड निकलवा कर निगम को ऊंचे ब्याज का फटका लगवा रहे हैं। जहां नगर निगम एक ओर वित्तीय संकटों से जूझ रहा है, ऐसे में ऊंचे ब्याज दर पर बॉन्ड से राशि जुटाना खतरनाक साबित हो सकता है। राशि जमा होने के बाद एक जैसा ब्याज – बॉन्ड निकालने का कोई बड़ा फायदा नगर निगम इंदौर को नहीं हो रहा है। ऐसा तर्क कुछ एनालिस्ट्स नगर निगम में चल रहा है। कंसल्टेंट बॉन्ड को बता रहे हैं बेहतर, इंदौर अमृत योजना-4 के तहत शहर में 1530 करोड़ की राशि से जल योजना तैयार की जानी है। यह राशि जुटाने में नगर निगम ने कंसल्टेंट के साथ तो गतिविधियां प्रारंभ की हैं, लेकिन भी अपने स्तर पर एनालिसिस करने में कोशिश में लगा हुआ है। कंसल्टेंट जहां बॉन्ड को बेहतर बता रहे हैं, वहीं निवेशकों का फायदा देख रहे हैं ताकि बॉन्ड को जल्द निकाल कर पैसा जुटा सके, लेकिन जब एक जैसा पैसा लगता है तो दो वर्ष बाद मूल रूप से आने को कोई बड़ा फायदा नहीं। इसमें ऊंचे ब्याज का फायदा निवेशकों को ही हो रहा है। जैसी की जल्दबाजी वाले मामले के परिणाम सामने आए हैं।
बैंक लोन होता है अधिक सस्ता
नगर निगम के अधिकारियों को बैंक लोन अधिक सस्ता और कारगर लग रहा है। सूत्रों का कहना है कि पहले के जो बॉन्ड जारी हुए हैं उनकी सब्सिडी भी अब तक नगर निगम को नहीं मिल पाई है। वे पैसे बैंक के खातों में ही जमा हैं। यह राशि तभी हासिल होगी जब बॉन्ड की राशि पूरी तरह चुका दी जाएगी। ऐसे में सब्सिडी के रूप में मिलने वाली राशि भी नगर निगम के हिस्से में इस वक्त तो कोई फायदा नहीं दे रही है।
ग्रीन बॉन्ड से नहीं मिला कोई फायदा
नगर निगम ने विगत साल में जो ग्रीन बॉन्ड लिया था, उस लोन से ज्यादा ही ब्याज देने में नुकसान लग रहा है। यह बॉन्ड 8 वर्ष की दर पर लिया गया था। इस बॉन्ड के जारी होने से कंसल्टेंट ने नगर निगम को फायदा होने की जो बातें बताई गई थीं, वह सही नहीं उतर रही हैं क्योंकि यह प्रोजेक्ट ही दो वर्ष लेट हो गया। 2023 में यह बॉन्ड जारी किया गया था और इससे पैसे जुटाए गए थे।
1530 करोड़ जुटाने के प्रयास
वर्तमान में अमृत-4 योजना के तहत नगर निगम 1530 करोड़ जुटाने की तैयारी में लगा हुआ है। कंसल्टेंट जहां बॉन्ड को बेहतर बता रहे हैं, वहीं अधिकारियों का कहना है कि बैंक लोन अधिक कारगर है क्योंकि इस लोन में जितना पैसा जमा होता है, उतने पैसे पर ब्याज फिक्स नहीं लगता। जबकि यहां एक बार जो रेट तय हो गई, उसी हिसाब से ब्याज अंत तक चुकाना पड़ता है।
इसके अलावा कंसल्टेंट से लेकर बॉन्ड जारी करने की जो एजेंसियां शामिल होती जाती हैं, उन्हें भी कमीशन और सर्विस चार्ज नगर निगम को ही भुगतान करना पड़ता है। इसी स्थिति में बॉन्ड अधिक भारी पड़ता है। जबकि यदि किसी बैंक से लोन लिया जाता है तो वह लोन कटौती के आधार पर होता है, बैंक के फिक्स एजेंट के अनुसार मूलधन से राशि की गणना करते हैं।




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