ग्रामीण एससी मोर्चा की कार्यकारिणी घोषित, हातोद के चन्द्रेश्वर छपोला बने जिलाध्यक्ष
इंदौर। भाजपा में परिवारवाद पर कांग्रेस को घेरने वाली पार्टी के भीतर ही अब ‘परिवार पहले, संगठन बाद में’ का नया अध्याय खुलता नजर आ रहा है। अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान परमार ने भोपाल से जारी कार्यवाही में अपने ही भतीजे कमल परमार को ग्रामीण जिला इकाई का महामंत्री बनवा दिया। इस नियुक्ति ने संगठन के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, भोपाल से जारी सूची में हातोद निवासी चन्द्रेश्वर छपोला को एससी मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया गया। छपोला लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और जमीनी कार्यकर्ता के रूप में उनकी पहचान रही है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कमल परमार के नाम की हो रही है, जिन्हें सीधे ग्रामीण जिला महामंत्री बना दिया गया।
जिलाध्यक्ष की सहमति से पहले ही ‘परिवार की एंट्री’
भाजपा संगठन में सामान्य तौर पर जिलाध्यक्ष की कार्यकारिणी उसके परामर्श और सहमति से बनती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नए जिलाध्यक्ष को अभी अपनी टीम तय करने का अवसर भी नहीं मिला था, तब पहली ही सूची में प्रदेश अध्यक्ष के भतीजे का नाम कैसे शामिल हो गया?
इतनी जल्दी क्यों थी?
ग्रामीण क्षेत्र के कई दावेदार पिछले कई महीनों से मोर्चा अध्यक्ष और महामंत्री पद के लिए सक्रिय थे। सूत्रों का दावा है कि भगवान परमार को आशंका थी कि यदि पूरी कार्यकारिणी जिलाध्यक्ष की सहमति से बनी, तो उनके भतीजे को मनचाहा पद नहीं मिल पाएगा। इसी कारण उन्होंने सीधे भोपाल स्तर पर नाम तय करवाया।





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