मोबाइल पर मिलेगा ओपीडी पर्चा, बिना पूरी तैयारी व्यवस्था पर उठे सवाल
इंदौर संकेत प्रतिनिधि
भोपाल। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस (एक नवंबर) से मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों से लेकर उप स्वास्थ्य केंद्र तक सभी सेवाएं पेपरलेस करने की योजना बनाई है। मरीजों को ओपीडी पर्चा भी मोबाइल पर ही उपलब्ध कराया जाएगा। इसे बिहार मॉडल की तर्ज पर किया जा रहा है, लेकिन पेच यह है कि बिहार में हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) शुरू करने के पहले लगभग तीन वर्ष तक कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया था।
300 करोड़ रुपये का बजट लगाकर इसे लागू किया गया है। मध्य प्रदेश में स्थिति यह है कि इसके लिए टैबलेट उपलब्ध कराए जाने हैं, जो अभी खरीदे ही नहीं गए हैं। न ही कर्मचारियों को किसी तरह का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके पहले मेडिकल कॉलेजों में यह व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन चल नहीं पाई। इसी तरह एनआईसी और सी-डैक के माध्यम से कुछ अस्पतालों में भी सुविधा शुरू की गई है, जिनमें एक-दो मॉड्यूल ही चल रहे हैं। ऐसे में बड़ा प्रश्न यही है कि बिना पूरी तैयारी व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी। दूसरा यह कि सभी रोगियों के पास एंड्रॉइड मोबाइल नहीं है। ऐसे में यदि व्यवस्था पेपरलेस की जाती है तो उनके पास रिकॉर्ड कैसे उपलब्ध हो पाएगा।
एचएमआईएस के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले जिला अस्पतालों में एनआईसी का ई-हॉस्पिटल सिस्टम चल रहा है तो कुछ में सी-डैक का ई-सुश्रुत चल रहा है। ई-हॉस्पिटल में नेक्स्ट जेन वर्जन भी पिछले वर्ष आया है, जिसमें कुछ नए मॉड्यूल जोड़े गए हैं। एम्स भोपाल सहित कई बड़े संस्थानों में ई-सुश्रुत चलता है।





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