इंदौर संकेत प्रतिनिधि
भोपाल। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम भले ही छात्रों और युवाओं से संवाद के तौर पर पेश किया जा रहा हो, लेकिन इसके सियासी मायने इससे कहीं ज्यादा बड़े माने जा रहे हैं। कांग्रेस की नजर मालवा-निमाड़ के उस राजनीतिक क्षेत्र पर है, जिसे मध्य प्रदेश की सत्ता के समीकरण में बेहद अहम माना जाता है। वहीं कांग्रेस की एकजुटता देखकर राजनीतिक जानकार भी हैरान हैं। सालों बाद कांग्रेसी इस तरह एक होकर काम कर रहे हैं।
कांग्रेसी नेताओं के अनुसार मालवा-निमाड़ में विधानसभा की कुल 66 सीटें हैं, जिनमें 22 सीटें आदिवासी बहुल हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस क्षेत्र में 47 सीटें जीतकर मजबूत राजनीतिक पकड़ दिखाई थी, जबकि कांग्रेस 18 सीटों पर सिमट गई थी। इसके उलट 2018 में कांग्रेस ने यहां 35 सीटों पर जीत दर्ज की थी। यही वजह है कि कांग्रेस अब युवाओं के मुद्दों के जरिए इस क्षेत्र में अपनी खोई राजनीतिक जमीन दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।
कार्यक्रम की अनुमति को लेकर भी सियासत गरमा गई है। राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस और सरकार के बीच अनुमति तथा स्थान को लेकर विवाद भी सामने आ चुका है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी कार्यक्रम को लेकर असहज है और इसी वजह से अनुमति देने में देरी की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि कार्यक्रम के लिए कई स्थान चिह्नित किए जा चुके हैं। अनुमति में देरी कर बीजेपी का ही नुकसान हो रहा है।
इंदौर में युवाओं से संवाद, निशाने पर बीजेपी
राहुल गांधी के कार्यक्रम में रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, महंगी शिक्षा और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दे उठाए जाने की संभावना है। कांग्रेस इन मुद्दों के जरिए प्रदेश के युवाओं के बीच सरकार के खिलाफ राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश कर रही है। कार्यक्रम के लिए इंदौर को चुना जाना भी राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है। इंदौर-मालवा-निमाड़ का सबसे बड़ा शहर होने के साथ ही 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इंदौर जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।
राजनीतिक जमीन दोबारा मजबूत करने की कोशिश
कार्यक्रम की अनुमति को लेकर भी सियासत-राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस और सरकार के बीच अनुमति तथा स्थान को लेकर विवाद भी सामने आ चुका है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी कार्यक्रम को लेकर असहज है और इसी वजह से अनुमति देने में देरी की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि कार्यक्रम के लिए कई स्थान चिह्नित किए जा चुके हैं। अनुमति में देरी कर बीजेपी का ही नुकसान हो रहा है।





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