रेसकोर्स रोड की पॉश कॉलोनी की ‘गुम’ जमीन का राज फिर सुर्खियों में, पुराने नक्शे से लेकर मौजूदा रिकॉर्ड तक खंगाले जा रहे दस्तावेज
अक्षय जैन
इंदौर। शहर की पॉश और प्रतिष्ठित रेसकोर्स रोड की एक पुरानी कॉलोनी में बगीचे के लिए छोड़ी गई जमीन आज कहां है? यह सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। कॉलोनी के विकासकर्ता एमएल रांका द्वारा तैयार किए गए पुराने लेआउट में बगीचे के लिए जमीन छोड़े जाने की बात स्थानीय नागरिकों द्वारा कही जा रही है। दावा है कि समय बीतने के साथ नक्शे में दिखाई देने वाली यह जमीन मौजूदा स्थिति में नजर नहीं आती।
मामला अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच चुका है और विचाराधीन है। लिहाजा इस विवाद में किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी अथवा कब्जाधारी घोषित करना फिलहाल उचित नहीं होगा। लेकिन सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं कि आखिर वह भूमि गई कहां?
पुराना नक्शा बनाम आज की हकीकत
स्थानीय लोगों के मुताबिक अब पुराने स्वीकृत नक्शे, लेआउट, राजस्व रिकॉर्ड, नगर नियोजन संबंधी दस्तावेज और वर्तमान स्थिति की पड़ताल की जा रही है। यदि रिकॉर्ड में बगीचे के लिए भूमि आरक्षित होने की पुष्टि होती है तो यह जानना भी जरूरी होगा कि बाद में उसके उपयोग अथवा स्वरूप में कोई परिवर्तन हुआ या नहीं।
किसके नाम, किसके उपयोग में?
पड़ताल का एक अहम हिस्सा यह भी है कि उक्त भूमि से संबंधित पुराने दस्तावेजों में किन-किन व्यक्तियों या संस्थाओं के नाम सामने आते हैं। जमीन के स्वामित्व, उपयोग और कथित कब्जे से जुड़े दावों की वास्तविकता दस्तावेजों और न्यायालयीन रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कॉलोनी के मूल नक्शे में यदि बगीचे के लिए भूमि निर्धारित थी, तो उसका वर्तमान स्वरूप क्या है और वह किस उपयोग में है, इसका जवाब सार्वजनिक हित से जुड़ा सवाल है।
फिलहाल न्यायालयीन प्रक्रिया जारी है। इसलिए अंतिम सच न्यायालय के निर्णय और प्रमाणित अभिलेखों से ही सामने आएगा। लेकिन रेसकोर्स रोड की इस कथित ‘गुम बगीचे की जमीन’ ने पुराने कॉलोनी नक्शों और आज की जमीनी हकीकत के बीच अंतर पर एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है।
सवाल सीधा है—नक्शे में बगीचा था, तो आज वह जमीन कहां है?




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