दतिया उपचुनाव में भाजपा ने एक नया फार्मूला अपनाया है। 35 साल से जमे भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद कई नेता, विधायक, पूर्व विधायक सकते में आ गए। इसका नजारा देपालपुर में सोशल मीडिया पर देखने को मिला।
जहां एक तरफ सोशल मीडिया पर लिखा गया, “दतिया का फार्मूला अब देपालपुर में भी लागू होगा।” यह निशाना विधायक पर लगाया गया। उसके बाद विधायक समर्थक भी सोशल मीडिया पर अपने नेता के लिए लिखते नजर आए, “टिकट तो हमारी जेब में है।”
इतना ही नहीं, कांग्रेस से भाजपा में गए पूर्व विधायक के समर्थक भी सोशल मीडिया पर एक्टिव हो गए। “दतिया तो केवल एक इशारा, देपालपुर अभी बाकी है।” लगातार एक-दूसरे के समर्थक सोशल मीडिया पर तीखे हमले करते हुए देखे गए।
भाजपा के इस फार्मूले ने कई नेताओं की नींद हराम कर दी है। दतिया फार्मूले से प्रदेशभर के नेता टेंशन में हैं। यह बीजेपी है, कुछ भी कर सकती है। घर बैठे आदमी को कब विधायक, सांसद बना दे, कुछ कह नहीं जा सकता। जो नेता क्षेत्र में सक्रिय नहीं थे, उन्होंने भी आना-जाना चालू कर दिया।
भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया है कि संगठन भाजपा के लिए सर्वप्रथम है। संगठन के खिलाफ जो जाएगा, उसे पार्टी बाहर का रास्ता दिखा देगी। भाजपा के लिए चुनौती होगी। एक-एक विधानसभा में तीन-तीन दावेदार को मैनेजमेंट करना।
अगर देपालपुर की बात करें तो वर्तमान विधायक मनोज पटेल, पूर्व विधायक विशाल पटेल, हिंदूवादी नेता राजेंद्र चौधरी जैसे दावेदार शामिल हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव को 2 साल से अधिक समय बाकी है, उसके बावजूद भी नेताओं ने अभी से मैदान पकड़ लिया और उनके समर्थक भी सोशल मीडिया पर आमने-सामने हो रहे हैं। इससे स्पष्ट पता चलता है कि नेताओं में टिकट को लेकर कितनी बेचैनी है।




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