इंदौर कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में मंगलवार को एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया। जनसुनवाई में पहुंची महिला ने अधिकारियों को बताया कि उसे मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि वह जीवित है। महिला ने कहा कि उसकी जमीन पर कब्जा करने की नीयत से फर्जी तरीके से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया गया।

महिला ने कलेक्टर से मिलकर कहा कि “मैं जिंदा हूं, लेकिन मेरे नाम का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। जमीन हड़पने के लिए मुझे मृत घोषित कर दिया गया।” महिला की बात सुनकर वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी हैरान रह गए।
महिला ने यह भी बताया कि जब उसने इस फर्जीवाड़े का विरोध किया तो उसके बेटों के साथ मारपीट की गई। परिवार को धमकाया गया और दबाव बनाया गया कि वे इस मामले को आगे न बढ़ाएं। महिला ने कहा कि उसके बेटों को पीटा गया ताकि वे जमीन के मामले में चुप रहें।
कलेक्टर ने इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि पूरे मामले की तहकीकात की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार को उजागर करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह दबंगई और सत्ता का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। जीवित महिला को मृत घोषित करना और उसके परिवार के साथ मारपीट करना कानून और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।




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