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नामांतरण घोटाला- विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री करवाने वालों को खोज रहा निगम

इंदौर। नगर निगम के बहुचर्चित नामांतरण घोटाले में अब नया और गंभीर मोड़ आ गया है। पंजीयन विभाग की ओर से नगर निगम को भेजी गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विवादित 354 संपत्तियों में से 51 की खरीदी-बिक्री की रजिस्ट्री हो चुकी है। इस जानकारी के सामने आने के बाद नगर निगम अधिकारियों ने नामांतरण करवाने वाले आवेदकों की तलाश शुरू कर दी है। नोटिस जारी करने के बाद अब कोई सामने नहीं आ रहा है।

पंजीयन विभाग की रिपोर्ट से खुला राज यह है कि नगर निगम के अपर आयुक्त आकाश सिंह ने पंजीयन विभाग को पत्र लिखकर 354 विवादित संपत्तियों की जानकारी मांगी थी। साथ ही पूछा गया था कि इनमें से कितनी संपत्तियों की नामांतरण के बाद खरीदी-बिक्री हुई है। जवाब में पंजीयन विभाग ने बताया कि 51 संपत्तियों की रजिस्ट्री हो चुकी है। इससे आशंका और गहरा गई है कि फर्जी तरीके से नाम दर्ज कराने वाले लोगों ने संपत्तियों का सौदा भी कर दिया।

संपत्तियों का मांगा गया पूरा ब्यौरा

रिपोर्ट मिलने के बाद नगर निगम ने पंजीयन विभाग से उन 51 संपत्तियों का विस्तृत विवरण मांगा है, जिनकी रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरी जानकारी मिलने के बाद यह स्पष्ट होगा कि संपत्तियों की बिक्री किन लोगों ने की और वर्तमान खरीदार कौन हैं। इसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

नामांतरण निरस्त, फिर भी हो गई रजिस्ट्री

घोटाला सामने आने के बाद नगर निगम ने अपने रिकॉर्ड में कई संपत्तियों के फर्जी नामांतरण निरस्त कर पुराने मालिकों के नाम बहाल करने का दावा किया था। लेकिन अब सामने आया है कि फर्जी नाम दर्ज रहने के दौरान कई संपत्तियों की रजिस्ट्रियां भी हो गईं। ऐसे में निगम की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच समिति की धीमी रफ्तार पर उठ रहे सवाल

नामांतरण घोटाला उजागर होने के बाद निगम आयुक्त ने तीन अपर आयुक्तों की जांच समिति बनाकर 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। हालांकि निर्धारित समय बीतने के बावजूद जांच पूरी नहीं हो सकी है। सूत्रों के मुताबिक समिति कार्रवाई तय करने के बजाय मामले को ई-नगर पालिका पोर्टल और शासन स्तर तक सीमित रखने की प्रक्रिया में उलझी हुई है। ऐसे में जांच की धीमी गति पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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