बदलहाल संगठन:- जमीन पर कांग्रेस की हालत खस्ता, कार्यकर्ता हताश…
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी साइकिल यात्रा करने निकले हैं, लेकिन यात्रा से पहले जमीन पर कांग्रेस को मजबूत करने की आवश्यकता है। इंदौर जिले में कांग्रेस के पास कार्यकर्ताओं की हालत खस्ता है। नगर से लेकर ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर देखा जाए तो जमीन पर कांग्रेस के पास कार्यकर्ता नहीं हैं। जो दमदार कार्यकर्ता थे, वे भाजपा में शामिल हो गए।
इंदौर जिले की बात करें तो क्षेत्र क्रमांक 2 और 4, सांवेर और महू में विधानसभा लड़ने वाला दमदार नेता ही नहीं है। कांग्रेस से भाजपा में गए तुलसी सिलावट ने कांग्रेस की जमीन सांवेर में ढीली कर दी। आधे से ज्यादा कांग्रेसी भाजपा में चले गए, इसलिए सांवेर फतह करना आसान नहीं है।
महू विधानसभा की बात करें तो अंतरसिंह दरबार के कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने के बाद वहां भी कांग्रेस के पास कोई दमदार नेता नहीं बचा। महू की नैया पार लगाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। राऊ की बात करें तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने ही क्षेत्र में 35 हजार वोटों से चुनाव हार चुके हैं। अपने गृह क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा।
राऊ में वर्तमान विधायक मधु वर्मा ने जमकर विकास कार्य किए हैं। यह कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती होगी। देपालपुर की बात करें तो यह सीट कांग्रेस की है, लेकिन देवेंद्र पटेल परिवार की आपसी खींचतान से हमेशा भाजपा चुनाव जीत जाती है। इस बार भी देपालपुर आसान नहीं है। पूर्व विधायक विशाल पटेल भाजपा में शामिल हो गए हैं, वे खुलकर कांग्रेस का विरोध करेंगे।
दूसरी ओर राधेश्याम, सत्यनारायण पटेल के अलावा मोती सिंह भी ताल ठोक रहे हैं। क्षेत्र क्रमांक 3 में अश्विन जोशी के निधन के बाद कांग्रेस यहां से अनाथ हो गई है। अश्विन जोशी के कार्यकर्ताओं से एक अलग रिश्ता था। दबंग नेता के रूप में काम करते थे। कार्यकर्ताओं के लिए लड़ने वाले नेता अब कार्यकर्ताओं के बीच नहीं हैं।
पिंटू एक बार फिर मैदान संभाल रहे हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं की अनदेखी उनके लिए बड़ी मुश्किल बन सकती है। इंदौर में विधानसभा 2 और 4 में तो कांग्रेस के पास उम्मीदवार ही नहीं हैं, फिर कैसे कांग्रेस चुनाव लड़ेगी?
जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े की भी निष्क्रियता चर्चा में बनी हुई है। पैराशूट जिला अध्यक्ष का जिले में जमकर विरोध हुआ, क्योंकि वानखेड़े आगर विधानसभा से जुड़े हुए थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें इंदौर जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया, जबकि जिले का अनुभव नहीं है। वे जिला कांग्रेस को नेतृत्व दे रहे हैं।
कई कांग्रेसियों ने कहा था कि क्या इंदौर में जिला अध्यक्ष बनने के लायक कांग्रेस के पास कोई नेता नहीं है, लेकिन प्रदेश प्रभारी ने इस बात को नजरअंदाज करते हुए वानखेड़े को जिला अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा है।
इंदौर जिले की बात करें तो कांग्रेस के लिए पटवारी के अलावा पटेल परिवार भी जिले में दमखम से राजनीति कर रहा है, लेकिन इंदौर से लेकर ग्रामीण अंचल तक कांग्रेस की हालत बेहद खराब है। कार्यकर्ताओं का मनोबल लगातार गिर रहा है और पार्टी से कम होता जा रहा है।
इसलिए जीतू भाई, आपको प्रदेश में साइकिल यात्रा की आवश्यकता नहीं है। पहले प्रदेश के प्रत्येक जिले के अंदर कांग्रेस को मजबूत करें। कांग्रेस की जमीन तैयार करें, कार्यकर्ताओं को समझें, लड़ने वाले कार्यकर्ताओं को आगे लाएं। तब जाकर प्रदेश में कांग्रेस का कल्याण हो सकता है। अभी वर्तमान हालातों में गांव-गांव और शहर में कांग्रेस की जमीन तैयार करने की जरूरत है।






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