भोपाल। दतिया उपचुनाव की जीत से लौटा कांग्रेस का आत्मविश्वास, अब संगठन में छंटनी से लेकर सरकार के खिलाफ नए अभियान तक की तैयारी; बड़े नेताओं की बैठक में बनेगा ढाई साल का रोडमैप। दतिया जीत के बाद कांग्रेस ने 2028 चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। 11 अगस्त की बैठक में संगठन मजबूत करने पर चर्चा होगी। कांग्रेस ‘स्लीपर सेल’ और भीतरघात रोकने की रणनीति बनाएगी। जिला और विधानसभा प्रभारी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। दतिया मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है।
दतिया उपचुनाव की जीत कांग्रेस के लिए सिर्फ एक विधानसभा सीट जीतने की कहानी नहीं है। पार्टी के भीतर अब इसे 2028 की तैयारी के लिए संगठन को दोबारा खड़ा करने के मौके के तौर पर देखा जा रहा है। इसी जीत के बाद 11 अगस्त को भोपाल में कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की अहम बैठक होने जा रही है। लेकिन इस बैठक का असली सवाल सिर्फ सरकार को घेरने की रणनीति नहीं है। बड़ा सवाल संगठन के भीतर का है, कौन पार्टी के साथ खड़े हैं और चुनाव के समय कौन पार्टी को नुकसान पहुंचा रहा है? कांग्रेस नेता पीसी शर्मा के ‘स्लीपर सेल’ और ‘फूल छाप कांग्रेसियों’ को लेकर दिए गए बयान ने इस सवाल को और राजनीतिक बना दिया है।यानी दतिया की जीत के बाद कांग्रेस अब सिर्फ जीत का जश्न मनाने के बजाय 2028 से पहले संगठन की अंदरूनी सफाई और राजनीतिक पुनर्गठन की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है।
दतिया ने कांग्रेस को जीत से ज्यादा ‘फॉर्मूला’ दिया?
विजयपुर के बाद दतिया की जीत ने कांग्रेस को एक ऐसा आत्मविश्वास दिया है, जिसकी पार्टी को लंबे समय से जरूरत थी। अब पार्टी यह देखना चाहती है कि जिस संगठनात्मक रणनीति ने दतिया में काम किया, उसे प्रदेश के दूसरे इलाकों में कैसे दोहराया जाए। यही वजह है कि 11 अगस्त की बैठक को सामान्य समीक्षा बैठक से ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां संगठन, जमीनी अभियान, सरकार को घेरने के मुद्दे और चुनावी तैयारी के साथ-साथ भीतर से नुकसान पहुंचाने वाले लोगों पर कार्रवाई की रणनीति पर भी चर्चा होने की बात कही गई है।






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