छोटे विक्रेताओं की बढ़ी परेशानी,वेंडर थमा रहे 50-50 वाले, बड़े विक्रेताओं ने कर लिया स्टॉक
इंदौर। इन दिनों कोषालय में 100 रुपए के स्टाम्प खत्म होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। अकेले शहर के स्टाम्प विक्रेताओं के यहां भी स्टॉक खत्म हो गया है। स्टाम्प का टोटा पड़ने से जरूरतमंदों और वकीलों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल छुट्टी का माहौल है, लेकिन सोमवार से सभी कार्यालय खुलेंगे तो स्टाम्प की कमी की परेशानी का सही अंदाजा लगेगा।
बताया जाता है कि पूर्व में जब 100 रुपए के स्टाम्प खत्म होते थे तो कोषालय अधिकारी हर स्टाम्प विक्रेता को समान रूप से 500-500 स्टाम्प देते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। कतिपय प्रभावी वेंडरों को अधिक तादाद में 100 रुपए के स्टाम्प दे दिए गए, जबकि छोटे स्टाम्प वेंडर परेशान हो रहे हैं। कोषालय में स्टाम्प खत्म होने के बाद जिला कोर्ट, कलेक्टर और जिला पंजीयन कार्यालय परिसर में स्टाम्प विक्रेताओं ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। स्टाम्प खत्म होने से सबसे ज्यादा परेशानी में छोटे स्टाम्प विक्रेता हैं। पूंजी कम होने से इन्होंने पहले से स्टॉक नहीं किया था।
इन कामों में होता है उपयोग-
100 रुपए के स्टाम्प का उपयोग नगर निगम, विद्युत मंडल, बैंक, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज और अन्य जरूरी शपथ पत्र व नोटरी संबंधी कार्यों के लिए होता है। 100 रुपए के स्टाम्प उपलब्ध नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है।
उठ रहे फायदा
बताते हैं कि बड़े स्टाम्प विक्रेताओं को खास फर्क नहीं पड़ा है, क्योंकि इनके पास पहले से ही लाखों के स्टाम्प मौजूद रहते हैं। सूत्रों के अनुसार, जिन बड़े विक्रेताओं के पास स्टाम्प उपलब्ध हैं, उनके द्वारा लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर 100 रुपए के स्टाम्प को 20 से 25 रुपए ज्यादा लेकर बेचा जा रहा है।
इस मामले में जब जिला कोर्ट में छानबीन की गई तो अधिकतर स्टाम्प विक्रेताओं के यहां 100 रुपए के स्टाम्प नहीं मिले। स्टाम्प विक्रेता मजबूरन 50-50 रुपए के स्टाम्प दे रहे हैं, जिससे ग्राहकों को भी एक की बजाय 2 स्टाम्प खरीदना पड़ रहे हैं। 50-50 रुपए वाले दो स्टाम्प खरीदने पर टाइपिंग आदि का खर्च भी ज्यादा आता है।





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