इंदौर ● इंदौर में मार्च माह में हुए अंगदान में किडनी प्रत्यारोपण में देरी का मामला चर्चा में है। इस मामले में नोटो (नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन) ने जांच भी शुरू कर दी है। इसे लेकर अब एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने कहा कि अंगदान होने पर अंग उन मरीजों को प्रत्यारोपित किए जाते हैं, जिनके नाम वेटिंग लिस्ट में होते हैं। तकनीकी कारणों या मरीज द्वारा मना करने पर वेटिंग लिस्ट में शामिल दूसरे मरीजों से पूछा जाता है।
23 मार्च को इंदौर में हुए अंगदान के बाद किडनी प्रत्यारोपण के लिए वेटिंग लिस्ट में बॉम्बे अस्पताल में भर्ती मरीज पहले स्थान पर था। उससे संपर्क किया गया, लेकिन चिकित्सकीय कारणों से मरीज को किडनी प्रत्यारोपित नहीं की जा सकती थी। दूसरी लिस्ट में जिस मरीज का नाम था, उसकी 17 मार्च को ही मौत हो चुकी थी। इसके बाद शैल्बी अस्पताल में भर्ती तीसरे मरीज को किडनी प्रत्यारोपित की गई। उसका नाम भी वेटिंग लिस्ट में था। कॉलेज डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने कहा कि अंगदान की प्रक्रिया सोटो, मध्य प्रदेश की गाइडलाइन के अनुसार की गई।
इंदौर अंगदान के मामले में देश में पहले स्थान पर है। आठ अगस्त को इंदौर में 69वां ग्रीन कॉरिडोर बना था और तीन लोगों को नया जीवन मिला। बीते चार महीनों में इंदौर में चार बार ग्रीन कॉरिडोर बने हैं, लेकिन 23 मार्च को इंदौर में ब्रेन-डेड मरीज के अंगदान के बाद अंग प्रत्यारोपण में देरी जांच के घेरे में आ गई है।




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