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174 कॉलोनियां वैधता की ओर, फिर भी निगम के खातों में विकास शुल्क का इंतजार

पहले वैध हुई 154 कॉलोनियों में चंद को छोड़ अधिकांश ने नहीं जमा किया शुल्क, नई 20 कॉलोनियों पर भी वही सवाल

इंदौर संकेत प्रतिनिधि

इंदौर। शहर की अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। 154 कॉलोनियों को पहले ही वैध किया जा चुका है और अब 20 और अवैध कॉलोनियों को वैध करने की तैयारी है। यानी वैधता की प्रक्रिया में आगे वाली कॉलोनियों को आंकड़ा 174 तक पहुंचने जा रहा है। नगर निगम की इस कार्रवाई से कॉलोनियों के प्लॉटधारियों को बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—जब पहले वैध की गई 154 कॉलोनियों से ही विकास शुल्क की वसूली पूरी नहीं हुई तो नई 20 कॉलोनियों को वैध करने से निगम को वास्तविक लाभ क्या मिलेगा?

जानकारी के मुताबिक 236 कॉलोनियों में से 154 को वैध किया जा चुका है और अब 20 और कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इससे हजारों प्लॉटधारकों के लिए नक्शा पास होने, बैंक ऋण मिलने और संपत्ति के वैध होने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन वैधता के साथ जुड़ा विकास शुल्क अब निगम के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है। सबसे अहम बात यह है कि पहले से वैध की जा चुकी 154 कॉलोनियों में चंद कॉलोनियों को छोड़ दें तो अधिकांश ने विकास शुल्क जमा नहीं किया है। इसके बावजूद नगर निगम की ओर से इन कॉलोनियों से शुल्क वसूलने के लिए कोई विशेष अभियान दिखाई नहीं दे रहा है। यानी एक तरफ निगम लगातार नई कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, दूसरी तरफ पहले वैध हो चुकी कॉलोनियों से ही बकाया विकास शुल्क वसूलने में तेजी नहीं दिखाई जा रही है।

सवाल यह है कि क्या वैधता सिर्फ लेआउट जारी करने और कागजों में कॉलोनी को वैध घोषित करने तक सीमित रह जाएगी? इस पूरी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन कॉलोनियों के प्लॉटधारियों को मिलता दिखाई दे रहा है, जो शहर के विकसित और घनी रिहायशी क्षेत्रों में हैं। लेकिन वैध होने के बाद भी प्लॉट की कानूनी स्थिति मजबूत होती है। भवन निर्माण का रास्ता खुलता है और बैंक ऋण मिलने की संभावना भी बढ़ती है। इससे संपत्ति की कीमत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है, लेकिन दूसरी तरफ निगम को विकास शुल्क मिलना जरूरी है, क्योंकि इसी राशि से कॉलोनी में सड़क, ड्रेनेज, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्यों को गति मिलनी है। यदि प्लॉट की कीमत बढ़ने का लाभ प्लॉटधारकों को मिल रहा है और विकास शुल्क की वसूली नहीं हो रही, तो विकास का खर्च आखिर कौन उठाएगा?

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