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इंदौर के 36 इलाकों में वर्षों बाद खुलेगा नक्शा मंजूरी का रास्ता, संपत्ति मालिकों को राहत

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अटकी प्रक्रिया को मिली रफ्तार

डेटा फॉर्म से मिलेगी बिल्डिंग परमिशन, निगम और टीएंडसीपी के बीच बनी सहमति

इंदौर शहर के पुराने मोहल्लों, बसी हुई कॉलोनियों और गांव बन चुके क्षेत्रों में रहने वाले हजारों संपत्ति मालिकों के लिए राहत भरी खबर है। वर्षों से भवन नक्शों की मंजूरी का इंतजार कर रहे लोगों को अब जल्द राहत मिलने वाली है। नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) विभाग के बीच सहमति बनने के बाद शहर के 36 क्षेत्रों में डेटा फॉर्म के माध्यम से भवन नक्शों की मंजूरी का रास्ता लगभग साफ हो गया है। अब केवल राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।

दरअसल, टीएंडसीपी से स्थल अनुमोदन नहीं होने के कारण नगर निगम इन क्षेत्रों में भवन अनुज्ञा जारी नहीं कर पा रहा था। इसके चलते न केवल नए मकानों का निर्माण रुका हुआ था, बल्कि पुराने मकानों पर बैंक लोन और अन्य वैधानिक कार्य भी प्रभावित हो रहे थे। यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इंदौर प्रवास के दौरान जनप्रतिनिधियों ने उठाया था, जिसके बाद उन्होंने जल्द समाधान के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, भोपाल से नगर निगम को पत्र जारी हुआ। इसके आधार पर नगर निगम आयुक्त शिवम सिंघल ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव से डेटा फॉर्म के जरिए नक्शे मंजूर करने की अनुमति मांगी।

10 दिन में अनुमति मिलने की उम्मीद

महापौर परिषद के अधिकारियों की तीन दौर की चर्चा के बाद कई प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि अगले 10 दिनों में सरकार से अनुमति मिलने की उम्मीद है। इसके बाद इन क्षेत्रों में डेटा फॉर्म के माध्यम से नक्शा मंजूरी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


इन शर्तों पर मिलेगी मंजूरी

दोनों विभागों की सहमति के अनुसार, नगर निगम केवल स्व-उपयोग (सेल्फ यूज) के लिए डेटा फॉर्म के आधार पर भवन अनुमति जारी करेगा। यदि भवन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधि, प्लॉटिंग या अन्य व्यावसायिक उद्देश्य के लिए किया जाना है तो पहले टीएंडसीपी से स्थल अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। इसी तरह 5 हजार वर्गफीट तक के विकसित भूखंडों पर नगर निगम सीधे भवन अनुमति दे सकेगा। जबकि इससे बड़े भूखंड, अविकसित भूमि तथा भूखंडों के विभाजन या विलय के मामलों में पहले नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की मंजूरी आवश्यक होगी।


वर्षों पुरानी समस्या का होगा समाधान

शहर के मध्य क्षेत्र के कई इलाकों में वर्षों से भवन नक्शे मंजूर नहीं हो रहे थे, जिससे विकास कार्य लगभग ठप पड़ गए थे। नए मकान नहीं बन पा रहे थे और पुराने भवनों पर बैंक ऋण लेने में भी लोगों को परेशानी हो रही थी। अब डेटा फॉर्म के जरिए नक्शा मंजूरी शुरू होने से रुके हुए निर्माण कार्य आगे बढ़ेंगे, बैंकिंग और अन्य नागरिक सेवाओं में भी बड़ी राहत मिलेगी। नगर निगम और टीएंडसीपी के बीच बनी यह सहमति शहर के पुराने और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विकास का नया रास्ता खोलने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।


इन 36 क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

कुशवाहखेड़ी, गाडराखेड़ी, बाणगंगा, भागीरथपुरा (ओल्ड), परदेशीपुरा, रेसकोर्स रोड, न्यू देवास रोड, व्यंकटेश नगर, छोटी खजरानी, दुबे का बगीचा, विनोबा नगर, मुराई मोहल्ला, उषागंज, श्रद्धानंद मार्ग, कलाली मोहल्ला, किबे कंपाउंड, साउथ तुकोगंज, एमजी रोड, आरएनटी मार्ग, छोटी ग्वालटोली, मनरामगंज, गली नंबर-6, नवरत्न बाग, बड़ी ग्वालटोली, कुमावतपुरा, बरसाथा, हाथीपाला, मुराई मोहल्ला (जुनी इंदौर), मल्हारगंज, बीके सिंधी कॉलोनी, मॉडल राज, जवाहर कॉलोनी, पागनी उड़ा, प्यासी मोहल्ला और चितावद सहित कुल 36 क्षेत्रों के हजारों संपत्ति धारकों को इसका लाभ मिलेगा।

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