देपालपुर। गौतमपुरा की गौतम पार्क कॉलोनी के रोज-रोज नए-नए खेल लगातार उजागर हो रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं से वंचित कॉलोनी के ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी कर प्लाट बेचने का काम किया जा रहा है। आए दिन नए-नए धोखे और मनमाने ऑफर निकालकर ग्राहकों को इसके जाल में फंसाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार पहले जिन ग्राहकों को प्लाट बेचे गए, वह नामांतरण के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इस कॉलोनी के डेवलपमेंट में हरीश चौधरी, रियाज पटेल और लव पाल के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने ग्राहकों को प्लाट तो दिए लेकिन जमीन पर मूलभूत सुविधाएं आज तक नहीं मिलीं। इसके बावजूद भी मनमाने ऑफर और नाम पर ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करने में कॉलोनाइजर बाज नहीं आ रहे हैं। ग्राहकों को बड़े-बड़े सपने दिखाए जा रहे हैं। मध्यम वर्गीय परिवार एक-एक रुपये की पूंजी जमा कर अपने लिए आशियाना बनाता है, लेकिन ऐसे धोखेबाज उन्हें अपने जाल में फंसाकर जीवन की सारी पूंजी बर्बाद करने को मजबूर कर देते हैं।
गौतम पार्क कॉलोनी का सेल्समैन ग्राहकों को प्लाट खरीदने के बाद 2 दिन में नामांतरण करवाने का वादा कर रहा है। लेकिन सेल्समैन को यह मालूम नहीं कि इस कॉलोनी का 22 लाख रुपये से अधिक टैक्स नगर परिषद गौतमपुरा ने बकाया है। जिसके चलते नगर परिषद ने कई बार नोटिस जारी किए हैं। इसके बावजूद भी कॉलोनाइजर ने नगर परिषद का भुगतान नहीं किया है। इतना ही नहीं, सेल्समैन यह भी कह रहा है कि नामांतरण हम कलेक्टर से करवा देंगे, आपको इसके लिए चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। नामांतरण का पूरा काम हमारी सेटिंग से होगा। यह बात सेल्समैन और ग्राहक के बीच फोन पर हुई, जिसका प्रमाण ग्राहक के पास मौजूद है।
सेल्समैन ने ग्राहकों से कहा कि प्लाट आप अभी ले लो, बिजली आने में 2 महीने लगेंगे क्योंकि इस कॉलोनी में बिजली को लेकर चोरी के केस बने हुए हैं। कॉलोनी में ट्रांसफार्मर लगाने के लिए बिजली विभाग का एक लाख रुपये से अधिक बकाया है। कॉलोनाइजर इस मामले की सेटिंग बिजली विभाग के अधिकारियों से कराने में लगा है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि लिफाफे के दम पर अधिकारियों के समक्ष कॉलोनाइजर की सेटिंग नहीं जमी। इसलिए अब प्लाट धारकों को सेल्समैन कह रहा है कि कॉलोनी में बिजली के लिए दो महीने का इंतजार करना होगा। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि कॉलोनाइजर सिर्फ अपना माल खपाने में लगा है। आम जनता को जो मूलभूत सुविधाएं हैं, उनसे कॉलोनाइजर को कोई लेना-देना नहीं है। जैसे-तैसे ग्राहकों को प्लॉट बेचकर कॉलोनाइजर फ्री होना चाहता है।
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक पीड़ित ने बताया कि मैं नामांतरण के लिए एक महीने से कॉलोनी के चक्कर लगा रहा हूं। मैंने मकान भी बना लिया, लेकिन अभी तक मेरा नामांतरण नहीं किया गया। यह प्लाट मैंने कॉलोनी के मैनेजर लव पाल के रिश्तेदार से लिया था। मेरी ओर से उनका पूरा भुगतान भी कर दिया, लेकिन उसके बावजूद भी नामांतरण नहीं करवाया जा रहा है। जानकारी में यह भी पता चला कि जो प्लाट लव पाल के रिश्तेदार ने बेचा, उस पर उन्होंने पहले ही लोन ले रखा है, जिसका भुगतान आज तक नहीं किया। मेरे साथ खुली धोखाधड़ी हुई है। मैं इस मामले की शिकायत कॉलोनी सेल के अधिकारी रोशनी पाटीदार के समक्ष करूंगा। जरूरत पड़ी तो इस मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा से भी बात करूंगा।






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