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इंदौर:डीपी ज्वैलर्स में वजन मशीन में गड़बड़ी,सील और सर्टिफिकेट भी निकले मिले

इंदौर में डीपी आभूषण फर्म के रेसकोर्स रोड स्थित डीपी ज्वैलर्स शोरूम की वजन मशीन में गड़बड़ी है। अधिवक्ता ग्राहक अंशुमन जाट वहां खरीदी के लिए गए थे। जब एक जेवर को दो मशीनों पर तुलवाया, तो इसमें कम-ज्यादा पाया गया। जब मशीन को देखा तो उस पर नापतौल का सर्टिफिकेट और सील/साइन नहीं थे। मौके से ही कलेक्टर शिवम वर्मा को शिकायत की गई। इसके बाद नापतौल विभाग के कंट्रोलर के. एस. ठाकुर और सब कंट्रोलर संजय पाटणकर जांच के लिए पहुंचे। यह फर्म संतोष कटारिया व विकास कटारिया की है। यह फर्म मूल रूप से रतलाम की है। इसके इंदौर सहित कई शहरों में शोरूम हैं।

जांच में 19 मिलीग्राम का मिला अंतर

जांच में पाया गया कि एक मशीन में 19 मिलीग्राम वजन का अंतर था। इस पर शोरूम के मैनेजर ने कहा कि चार में से एक पाया टूट गया है और गलती से इस पर ध्यान नहीं दिया गया, इसलिए ऐसा हुआ। वहीं नापतौल विभाग द्वारा वजन मशीन को सर्टिफाइड किया जाता है, लेकिन यह सर्टिफिकेट मशीन के पास नहीं था और अलग बॉक्स में रखा गया था। साथ ही विभाग द्वारा सत्यापन करते समय लगाई गई सील भी मशीन पर नहीं थी।

अधिकारियों ने की केस बनाने की पुष्टि

कंट्रोलर के.एस. ठाकुर ने कहा कि शिकायत के बाद शोरूम पर वजन मशीन को लेकर केस बनाया गया है। इसमें एक मशीन में वजन तौलने में खामी थी, उसका पाया टूटा था। वहीं सील और सर्टिफिकेट का सही डिस्प्ले नहीं था। नियमानुसार इस केस में हर डायरेक्टर, फर्म और शोरूम मैनेजर पर 5500-5500 रुपए का अर्थदंड लगता है। वहीं इस संबंध में द सूत्र ने शोरूम मालिक संतोष कटारिया को फोन किया और व्हाट्सएप मैसेज किया लेकिन उनका जवाब नहीं आया। लिए शोरूम मैनेजर ने कहा कि सील बार-बार गिर रही थी इसलिए अलग रखी है और वह विभाग के अधिकारियों को दिखाई गई।

शिकायत करने वाले ग्राहक बोले- इसमें मिलीभगत

इस मामले की शिकायत करने वाले ग्राहक अधिवक्ता जाट ने कहा कि यह काम बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के नहीं हो सकता है। जब सील और सर्टिफिकेट मशीन पर होने चाहिए थे, तो वह क्यों नहीं थे? क्योंकि मैं अधिवक्ता था और कलेक्टर को शिकायत की थी इसलिए यह कार्रवाई हो सकी। हालांकि विभागीय अधिकारी ठाकुर ने कहा कि मिलीभगत वाली कोई बात नहीं है। विभाग ने दिसंबर 2025 में यह सारी मशीनें सत्यापित की थीं और इसके सील व सर्टिफिकेट भी थे। लेकिन सील बार-बार निकल रही थी तो उन्होंने वहां से हटा दी थी, जिस पर जुर्माने का प्रावधान है।

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