मप्र कांग्रेस की पीएसी की वर्चुअल बैठक में उठा उज्जैन के भूमि आवंटन विवाद का मामला
भोपाल। उज्जैन में एक ट्रस्ट को भूमि आवंटन विवाद को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की मंगलवार को हुई वर्चुअल बैठक में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के हालिया बयान को लेकर कई नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। नेताओं का कहना था कि यदि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बयान अलग-अलग होंगे, तो कार्यकर्ताओं के लिए जनता के बीच इस मुद्दे को उठाना मुश्किल हो जाएगा।
बैठक में पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मैदान में पार्टी कार्यकर्ता संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन यदि वरिष्ठ नेता ही प्रदेश अध्यक्ष के रुख को कमजोर करेंगे, तो जनता के सामने जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पार्टी की पूरी मुहिम को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा।
बैठक में विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भूमि आवंटन का गंभीर मुद्दा उठाया, लेकिन दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस जनता के बीच जाएगी, तो लोग पूछेंगे कि आखिर सही कौन है—जीतू पटवारी या दिग्विजय सिंह। पहले पार्टी के भीतर एक राय बननी चाहिए, तभी आंदोलन प्रभावी होगा।
करोड़ों की जमीन आरएसएस के लोगों को 1 रुपये में दी
बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन एक रुपये की लीज पर ट्रस्टों को दी गई और इसका लाभ आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोगों को मिलता है। उन्होंने कहा कि राम जन्म भूमि ट्रस्ट को भी नरेंद्र मोदी सरकार ने सरकारी ट्रस्ट बनाया था। उन्होंने दावा किया कि 2000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के प्रमाण सामने आ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या से लेकर उज्जैन महाकाल तक भाजपा ने देश की आस्थाओं के साथ छल किया है और सार्वजनिक संपत्तियों का दुरुपयोग हुआ है।




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