इंदौर। नगर निगम के चर्चित डबल नामांतरण घोटाले की जांच शुरू होने के बावजूद आरोपों के घेरे में आए दोनों उपायुक्त अब भी राजस्व विभाग में पदस्थ हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल हटाने की मांग की है।
नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष सोनाली मर्मट ने आरोप लगाया कि एक ही रात में 354 संपत्तियों का डबल नामांतरण होना बिना वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के संभव नहीं है। ऐसे में केवल कम्प्यूटर ऑपरेटरों पर कार्रवाई कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो कांग्रेस निगम आयुक्त कार्यालय और महापौर कार्यालय का घेराव करेगी।
354 संपत्तियों में हुआ था डबल नामांतरण
जांच में सामने आया है कि 354 संपत्तियों के डबल नामांतरण के लिए दो उपायुक्तों की लॉगिन आईडी का उपयोग किया गया। हालांकि निगम प्रशासन ने मामले में पांच कम्प्यूटर ऑपरेटरों पर कार्रवाई की है, लेकिन जिन अधिकारियों की आईडी इस्तेमाल हुई, उनके खिलाफ अब तक कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है।
पुराने रिकॉर्ड बहाल करने की प्रक्रिया शुरू
नगर निगम प्रशासन ने प्रभावित संपत्तियों के मूल दस्तावेजों का सत्यापन शुरू कर दिया है। जिन संपत्तियों में गड़बड़ी मिली है, वहां पुराने खाताधारकों के नाम बहाल किए जा रहे हैं। संबंधित एजेंसियों की मदद से रिकॉर्ड का मिलान भी किया जा रहा है।
जांच की निष्पक्षता पर उठे सवाल
विपक्ष का कहना है कि जिन अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है, वे उसी विभाग में बने हुए हैं। इससे दस्तावेजों और साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। कांग्रेस का आरोप है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को जांच पूरी होने तक विभाग से हटाया जाना चाहिए।
निगम प्रशासन का पक्ष
नगर निगम के राजस्व अपर आयुक्त आकाश सिंह ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी प्रभावित संपत्तियों के रिकॉर्ड का सत्यापन और सुधार कार्य जारी है।फिलहाल पूरे मामले में जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार जा रहा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।






Total Users : 23481
Leave a comment