Home ताज़ा ख़बर अधिकारियों की अनदेखी और प्राचार्या की मनमानी
ताज़ा ख़बरदेश-प्रदेशनगर निगम इन्दौरप्रशासनिकराजनीतिशिक्षा

अधिकारियों की अनदेखी और प्राचार्या की मनमानी

देपालपुर की 105 छात्राएं सांदीपनि स्कूल में शिक्षा से वंचित, जर्जर कमरे में पढ़ने को मजबूर

शासन स्तर पर करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हुए भव्य भवनों के बावजूद देपालपुर में जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी और प्राचार्या की मनमानी के चलते मासूम बच्चियों का भविष्य अंधकार में लटका है। शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का सर्वसुविधायुक्त नया भवन बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन प्राथमिक कन्या शाला की कक्षा 1 से 5वीं तक की लगभग 105 छात्राएं आज भी मूलभूत सुविधाओं से विहीन, जर्जर और बदहाल पुरानी इमारत में बैठने को मजबूर हैं।

कागजों में मर्ज, लेकिन जमीन पर भेदभाव

क्षेत्र के गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से शासन ने मॉडल स्कूल और कन्या शाला का संविलियन (मर्ज) कर सांदीपनि विद्यालय की मंजूरी दी थी। सरकारी रिकॉर्ड और प्रक्रिया के परिणामों में भी दोनों स्कूलों को एक ही दर्शाया जा रहा है। नया भवन बनने तक दोनों स्कूल अपनी पुरानी जगहों पर संचालित हो रहे थे।

अब करीब तीन साल के इंतजार के बाद 1700 विद्यार्थियों की क्षमता वाली नई हाईटेक बिल्डिंग तैयार हो चुकी है और एक महीने से कक्षाएं भी शुरू हो गई हैं। हालांकि, प्रशासन ने मॉडल स्कूल के बच्चों को तो नए भवन में शिफ्ट कर दिया, लेकिन प्राथमिक कन्या शाला की 105 छात्राओं को पुराने जर्जर भवन में ही छोड़ दिया।

150 मीटर की दूरी पर ‘बस’ का अजीब तर्क

मामले में सांदीपनि विद्यालय की प्रभारी प्राचार्या अमिता मुंद्रा का तर्क हैरान करने वाला है। उनका कहना है कि “जब तक बच्चों के लिए बस की व्यवस्था नहीं होती, तब तक उन्हें शिफ्ट नहीं किया जा सकता। और मेरे को शासन द्वारा आदेश दिया गया है कि आप नए बच्चों के एडमिशन करो और फिर उसके हिसाब से शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, अभी वहां पर 5 शिक्षक हैं जिसमें से 2 शिक्षक बिटिया हैं, ऐसे में वह वहां तो भेजे नहीं जा सकते। इसलिए बच्चों पर परेशानी आएगी के लिए उन्होंने पुरानी इमारत में ही स्कूल चलाने का मांग का पत्र लिखा है।”

सुविधाओं के नाम पर शून्य

पुराने भवन में पढ़ रही मासूम बच्चियों को न तो पीने का साफ पानी नसीब हो रहा है और न ही इस्तेमाल योग्य शौचालय। छात्राओं के पास न तो खेलने का मैदान है और न ही बैठने की उचित व्यवस्था, जिसके कारण बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

इस गंभीर स्थिति के बावजूद शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें मूंदे बैठी हैं। रहम की बात सांदीपनि के नए भवन की दूरी मात्र 150 मीटर (5 मिनट का रास्ता) है। ऐसे में ‘बस’ का बहाना कितना तर्कसंगत है, क्या शिक्षकों की व्यक्तिगत सहूलियत के लिए 105 मासूम बच्चियों को सुरक्षित वातावरण और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जाना उचित है।

अधिकारी का कहना

“इस विषय में प्राचार्या से चर्चा कर आधिकारिक पत्र जारी कर रहा हूं। सभी बच्चों को तत्काल सांदीपनि स्कूल की नई बिल्डिंग में शिफ्ट कराने की कार्रवाई की जाएगी।”

माधव सिंह बामनिया, ब्लॉक (विकासखंड शिक्षा अधिकारी), देपालपुर

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Our Visitor

031489
Total Users : 31489

Related Articles