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दीपावली की रौनकें कम, राखी के बाद मंहगा हुआ राखी बाजार

इंदौर। भगीरथपुरा की हर गली में भले ही माहौल हो महोत्सव जैसा, लेकिन इस बार राखी बाजार में रौनक कम नजर आ रही है। बाजारों में रंग-बिरंगी राखियां, मिठाइयों की खुशबू और भाई की कलाई पर राखी बांधती बहनों के चेहरे—लेकिन बड़े से भगीरथपुरा में इस बार त्योहार का रंग फीका है। राखियां तो दुकानों पर सजी हैं, मगर कई परिवारों के लिए खरीदारी अब मुश्किल हो चुकी है। दूषित पानी के मामले में 36 लोगों की मौत के बाद यह पहला रक्षाबंधन है, जब कई परिवार अपनों के बिना त्योहार मनाने को मजबूर हैं।

भगीरथपुरा की गलियों में इस बार त्योहार की रौनक से ज्यादा खामोशी नजर आती है। जिन घरों में हर साल बहनों के आने और बच्चों की किलकारियों से चहल-पहल रहती थी, वहां इस बार अपनों की यादें हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ गलियों के आसपास तो ऐसा मातम पसरा जाता है, जिससे इस त्रासदी में अपना कोई सदस्य खोया है।

राखी हाथ में है… भाई की कलाई नहीं— नंदेनी के घर में पानी की त्रासदी के कारण हंसी-खुशी की जगह उदासी है। उसकी बहन काजल के हाथ में आज एक राखी है। यह वही राखी है, जिसे उसने पिछले साल अपने भाई के लिए खरीदा था। राखी बड़ी थी, इसलिए उस समय बांध नहीं पाई। उसने उसे संभालकर रख लिया था कि अगले साल भाई के कलाई पर बांधेंगी। परिवार का कहना है कि भगीरथपुरा के लोगों को अब तक न्याय नहीं मिला है। दोषियों को सजा नहीं हुई। उन्हें न्यायालय से उम्मीद है कि एक दिन उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। उनका कहना है कि…

राखी के आने से पहले ही गंदा नाला पसरा हुआ है।

इलाके के पानी में अभी भी कई बार बदबू आती है। ये लोगों ने बताया कि पानी साफ करने के लिए प्रशासन परिवार को मांग है कि प्रशासन मुआवजे की राशि बढ़ाए, ताकि प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिल सके। भगीरथपुरा में वैसे राखी की दुकान लगाने वाले भी विकास बताते हैं कि इस बार बिक्री काफी कम है। रक्षाबंधन से पहले जिन बाजारों में भीड़ रहती थी, वहां दुकानदार ग्राहकों को इंतजार कर रहे हैं।

राखियां… पर खुशियां नहीं

भगीरथपुरा में इस बार रक्षाबंधन की तस्वीर कुछ ऐसी है कि किसी घर में मां नहीं है, किसी में बहन नहीं है और किसी में भाई नहीं हैं। राखी की दुकानों पर रंग-बिरंगी राखियां अब भी सजी हैं। मिठाइयां भी बिक रही हैं। लेकिन जिन घरों में कभी इस त्योहार पर बच्चों जैसी मस्ती होती थी, वहां इस बार अपनों की यादें हैं।

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