जनविश्वास शिविर में तहसीलदार ने छात्राओं को भगाया
दैनिक इंदौर संकेत
देपालपुर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनता की चौखट तक सरकार पहुंचाने के लिए ‘जनविश्वास शिविर’ लगवा रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की अफसरशाही की पुरानी आदतें इतनी जल्दी कहां जाने वाली हैं! ताजा मामला गौतमपुरा से सामने आया है, जहां सरकारी स्कूल में कमरों और बाउंड्रीवाल की गुहार लगाने पहुंचीं 10वीं की मासूम छात्राओं को अफसर के रौब का सामना करना पड़ा। आरोप है कि तहसीलदार ने समस्याओं का हल निकालना तो दूर, बच्चियों को फटकार लगाकर रोने पर मजबूर कर दिया।
तस्वीरें गौतमपुरा के जनविश्वास शिविर की हैं, जहां सरकार का ‘विश्वास’ अफसरशाही की अकड़ के आगे टूटता नजर आया। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की 10वीं की छात्राएं हाथों में आवेदन लिए पहुंची थीं। मांग बड़ी नहीं थी, बस स्कूल में क्लासरूम की कमी, हॉल और एक बाउंड्रीवाल चाहिए थी, ताकि वे सुरक्षित पढ़ सकें। शिविर के मुख्य अतिथि जिला पंचायत सीईओ हिमांशु प्रजापति थे। छात्राएं अपनी फरियाद लेकर मंच की ओर बढ़ ही रही थीं कि बीच में दीवार बनकर खड़े हो गए टप्पा तहसीलदार कुलदीप सिंह।
छात्राओं का आरोप है कि तहसीलदार साहब ने उनसे अभद्रता की और उन्हें डांट-फटकार कर वहां से भगा दिया। अपमान का घूंट पीकर छात्राएं वहीं रोते हुए पंडाल से बाहर निकल गईं। मासूम बच्चियों के आंसुओं ने जब शिविर में मौजूद स्थानीय लोगों को झकझोरा, तो हंगामा मच गया। बात जब मंच तक पहुंची तो आनन-फानन में माइक से अनाउंसमेंट कर रोती हुई छात्राओं को दोबारा मंच पर बुलाया गया। जिला पंचायत सीईओ हिमांशु प्रजापति ने छात्राओं की बात सुनी और जल्द से जल्द स्कूल की समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिया।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं तहसीलदार
मामले ने तूल पकड़ा तो तहसीलदार कुलदीप सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए सफाई दी। तहसीलदार का कहना है कि छात्राओं से उन्होंने कोई गलत बात नहीं की। आवेदन प्राचार्य के नाम पर था, इसलिए उन्होंने सिर्फ प्राचार्य से बात की और बालिकाओं से कोई अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया।

वहीं, स्थानीय लोगों और सूत्रों की ओर से तहसीलदार पर गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। सूत्रों का दावा है कि किसान अपने काम के लिए कार्यालय के चक्कर लगाते रहते हैं। आरोप यह भी है कि बिना ‘लिफाफे’ के किसी फाइल को आगे नहीं बढ़ाया जाता। एक कोटवार को रास्ता देने के लिए तहसीलदार द्वारा नौकरी खा जाने की धमकी देने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मामला मीडिया में पहुंचने के बाद तहसीलदार हरकत में आए थे, लेकिन बाद में फिर विवाद सामने आ गया। अब सवाल यही उठता है कि जिस मंच को जनता का विश्वास जीतने के लिए सजाया गया था, वहीं मासूम छात्राओं को अपमान के आंसू क्यों मिले?
स्थानीय नागरिकों ने साफ कहा है कि बच्चियों का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘जनविश्वास शिविर’ में पलीता लगाने वाले इस रवैये पर प्रशासन क्या एक्शन लेता है।





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