तिथियों की घटबढ़ से 9 साल बाद आया अवसर, 14 से 25 सितंबर तक मनेगा उत्सव
इंदौर। गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) तक चलता है। यह अवधि मुख्य रूप से 10 तिथियों (चतुर्थी से चतुर्दशी) की होती है। इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर है, जब भगवान गणेश की स्थापना होगी, अनंत चतुर्दशी यानी प्रतिमा विसर्जन 25 सितंबर को होगा। स्थापना और विसर्जन वाले दोनों दिनों को मिलाकर कुल 12 दिन होंगे।
हालांकि, पंचांग में किसी तिथि की वृद्धि या क्षय के कारण दिनों की संख्या में एक दिन का अंतर आ सकता है, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से यह 10 दिवसीय मुख्य उत्सव ही माना जाता है, जिसे लोग अपनी श्रद्धा अनुसार 12 दिनों तक मनाएंगे। ज्योतिषियों के अनुसार नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पंचांग में तिथियों के इस प्रकार मेल खाने से यह उत्सव और भी विशिष्ट व फलदायी माना जा रहा है।
पंचांग गणना के अनुसार तिथियों के घट-बढ़ से कई वर्षों बाद इस तरह का पंचांगीय संयोग बनता है। इसके साथ ही गणेश चतुर्थी सोमवार यानी भगवान शिव के दिन पड़ना भी अच्छा माना जा रहा है। पिता और पुत्र के इस अद्भुत संयोग से इस बार का उत्सव आध्यात्मिक रूप से बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है।
गणेशोत्सव की तिथियां
तिथियों की वृद्धि : पंचांग और तिथियों की गणना के अनुसार, इस बार तृतीया तिथि से लेकर अनंत चतुर्दशी तक का योग ऐसा बन रहा है कि उत्सव की कुल अवधि बढ़कर 12 दिन हो गई है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 14 सितंबर को सुबह 05:22 बजे से और समापन 15 सितंबर सुबह 07:14 बजे तक।
14 सितंबर के दिन के शुभ मुहूर्त : प्रातःकाल हरितालिका पूजा मुहूर्त सुबह 06:26 से 07:06 तक। मध्याह्न गणेश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:09 से 12:58 तक। गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त : मध्याह्न 11:20 से 01:48 तक।
शाम को पूजा के लिए गोधूलि मुहूर्त : 06:42 से 07:05 तक। चंद्र दर्शन निषेध गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखना वर्जित माना जाता है। 14 सितंबर को सुबह 09:12 बजे से रात 08:58 बजे तक चंद्र दर्शन से बचें (मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से मिथ्या कलंक लगता है)।
ऐसे करें स्थापना : स्थापना के लिए उत्तर-पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की नई मूर्ति स्थापित करें। स्थापना के समय दूर्वा, मोदक या बेसन के लड्डू, लाल फूल (जासवंद, गुड़हल), अक्षत और शमी के पत्ते अवश्य अर्पित कर आरती करें।






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