गुंडागर्दी और अवैध माइनिंग तभी फलती-फूलती है, जब उन्हें कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और सत्ताधारी राजनेताओं का खुला संरक्षण प्राप्त होता है। अवैध खनन से उपजा काला धन और भारी भरकम फंडिंग प्रशासनिक ताकत को कमजोर कर देती हैं। जो भी इस नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश करता है या तो उस अधिकारी का तबादला हो जाता है या फिर उससे सीधे गुंडागर्दी की जाती है। इंदौर खनिज विभाग की यही तस्वीर दिख रही है। अवैध खनिज से भरी गाड़ियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने वाली सहायक खनिज अधिकारी स्वाति ठाकुर का एक साल के चलते ही इंदौर से तबादला और ईमानदारी से काम करने वाले सहायक खनिज अधिकारी आलोक अग्रवाल और खनिज के सैनिक भूपेंद्र सिंह से सुपर कॉरिडोर पर दिनदहाड़े की गई गुंडाई इसका जीता-जागता सबूत है कि करोड़ों रुपए का अवैध खनन करने वाले और उसे बाजार में बेचकर लाखों की रॉयल्टी रोज चुराने वाले खनिज माफिया पर राजनीतिक संरक्षण कितना मजबूत है।
अवैध माइनिंग और गुंडागर्दी के साम्राज्य के नेक्सस समझना और आसान हो गया, जब सहायक खनिज अधिकारी आलोक अग्रवाल ने निरीक्षण के दौरान सुपर कॉरिडोर पर अवैध परिवहन करते हाईवा गाड़ी MP09 DX 5970 को पकड़ा और होमगार्ड के जवान भूपेंद्र सिंह को गाड़ी में बिठाकर गांधीनगर थाने में खड़ा करने रवाना किया। इस दौरान सुपर कॉरिडोर स्थित टीसीएस चौराहे पर फिल्मी स्टाइल में गुंडागर्दी दिखाते हुए रास्ते में ही काली स्कॉर्पियो और क्रेटा गाड़ी में आए 5 से 6 गुंडों ने डंपर को रोककर होमगार्ड सिपाही के साथ मारपीट करते हुए गाड़ी छुड़ाकर ले गए।
जहां एक ओर आलोक अग्रवाल को बातचीत में लगाकर रोका गया, वहीं आगे तैयार खड़े गुंडों ने होमगार्ड सैनिक को गाड़ी से फेंककर मुरम से भरा डंपर भगा ले गए। जब्त किए गए अवैध खनन के वाहन को खनन माफिया द्वारा जबरन छुड़ा ले जाना कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी और बेहद चिंताजनक चुनौती बन चुका है।
गौरवशाली का गुंडागर्दी का दुस्साहस
खनिज प्रशासन के साथ हुई इस गुंडागर्दी को लेकर शहर के बड़े अधिकारी मौन व्रत धारण किए हुए हैं। क्योंकि जिस खदान से गाड़ी निकालकर आ रही थी, उस खदान संचालक के ऊपर प्रदेश के बड़े राजनेताओं का हाथ है। सैनिक भूपेंद्र सिंह ने पुलिस को की गई शिकायत में अवैध परिवहनकर्ता और आदतन अपराधी लखन गुर्जर का नाम उजागर किया है, जिस पर पहले भी खनिज विभाग द्वारा अवैध परिवहन की कार्रवाई की गई है। शिकायत में लखन गुर्जर को अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति बताया गया है।
डंपर MP09 DX 5970 के मालिक कमलेश चौकसे और उसके साथियों के इस दुस्साहस का प्रशासन ने अभी तक उचित जवाब नहीं दिया है। शायद इस घटना के होते ही कुछ रसूखदारों के फोन खनिज और बड़े प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गए हैं। मामले को शांत करने की कोशिश की जा रही है, मगर खबर मीडिया में आने के बाद कार्रवाई के नाम पर मात्र कागजी हवाई जहाज उड़ाए जाने की पूरी संभावना है।
राजनीतिक संरक्षण कितना मजबूत है
अवैध माइनिंग और गुंडागर्दी के साम्राज्य के नेक्सस को समझना आसान हो गया है। सहायक खनिज अधिकारी आलोक अग्रवाल ने निरीक्षण के दौरान सुपर कॉरिडोर पर अवैध परिवहन करते हाईवा वाहन को पकड़ा था। इसके बाद जिस तरह से रास्ते में गुंडों ने वाहन को रोका और बलपूर्वक छुड़ाकर ले गए, उसने खनिज माफिया के हौसलों और राजनीतिक संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारी का बयान
“बिना रॉयल्टी के अवैध परिवहन करते वाहन क्रमांक MP09 DX 5970 को पकड़ा गया था। राजस्व की चोरी करने वाले वाहन को गांधी नगर थाने खड़ा करने के लिए होमगार्ड सैनिक के साथ पहुंचाया गया था। इसी दौरान लखन गुर्जर और वाहन मालिक ने सैनिक के साथ गाली-गलौच और जबरदस्ती करते हुए वाहन बलपूर्वक छुड़ा ले गए। वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आरोपियों पर प्रकरण दर्ज करने समेत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
— आलोक अग्रवाल, सहायक खनिज अधिकारी, इंदौर






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