इंदौर। इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष माना जा रहा है। 4 सितंबर को जन्माष्टमी के अवसर पर करीब पांच हजार साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जन्मकाल से जुड़ी कई स्थितियां एक साथ बनेंगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और इस बार जन्माष्टमी पर भी रोहिणी नक्षत्र, वृषभ राशि और मध्यरात्रि के समय चंद्रमा की स्थिति विशेष संयोग बना रही है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का होना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को अपनी तिथि की रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इस बार भी वैसी ही स्थिति बन रही है। इससे पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
मध्यरात्रि में होगा जन्मोत्सव : जन्माष्टमी पर मंदिरों में दिखेगा उत्साह
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और विशेष आयोजन होंगे। रात में श्रद्धालु भगवान के जन्म का इंतजार करेंगे। मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान मंदिरों में शंख-घंटियों की गूंज के बीच भगवान का अभिषेक, पूजन और आरती की जाएगी।
मंदिरों में शुरू हुई तैयारियां- जन्माष्टमी को लेकर शहर के विभिन्न कृष्ण मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों में विशेष सजावट, आकर्षक विद्युत रोशनी और झांकियां तैयार की जा रही हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को विशेष रूप से सजाया जाएगा। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, मटकी सजावट और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। मान्यता है कि जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का विधि-विधान से पूजन करने और मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस बार बनने वाले दुर्लभ संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर समितियों द्वारा भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।






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