जहां हर बारिश में भरता है पानी वहां पहुंचेगी निकासी की लाइन
इंदौर। हर बारिश में सड़क पर जमा पानी, जलभराव होते इलाके और घंटों तक पानी निकासी का इंतजार करना पड़ता था। इस समस्या से शहर को निजात दिलाने के लिए नगर निगम ने अब बड़ा दांव खेला है। निगम ने डिजास्टर मैनेजमेंट फंड के तहत केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपए मांगे हैं। इस राशि से शहर के उन इलाकों में नई स्टॉर्म वाटर लाइन बिछाई जाएगी, जहां जलजमाव तो होता है, लेकिन पानी की निकासी के लिए पर्याप्त लाइन नहीं है।
इसी प्रस्ताव को लेकर नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने भोपाल में राज्य सरकार के अधिकारियों के सामने निगम का तैयार किया हुआ प्रोजेक्ट रखा। अधिकारियों के स्तर पर प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। अब इसे हाई पावर कमेटी और मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। वहां से क्लियरेंस मिलने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार से मिलने की उम्मीद है। प्रस्ताव के मुताबिक कुल लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राशि राज्य सरकार देगी। पैसा राज्य सरकार के माध्यम से स्थानीय निकाय यानी नगर निगम को उपलब्ध कराया जाएगा।
निगम ने ऐसे इलाकों को प्रोजेक्ट में प्राथमिकता दी है, जहां बारिश के दौरान बार-बार जलजमाव होता है। इन क्षेत्रों में या तो स्टॉर्म वाटर लाइन है ही नहीं या मौजूद लाइन पानी की निकासी के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे स्थानों पर नई लाइन बिछाकर बारिश के पानी को तेजी से बाहर निकालने की व्यवस्था की जाएगी।
निगम के लिए आसान नहीं
शहर में बड़े पैमाने पर स्टॉर्म वाटर लाइन बिछाने का काम निगम के लिए अकेले करना आसान नहीं है। निगम की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए 200 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट अपने संसाधनों से पूरा करना मुश्किल है। इसी वजह से केंद्र और राज्य सरकार से फंडिंग लेने का रास्ता चुना गया है। राज्य स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। केंद्र से मंजूरी और फंड मिलने के बाद जलजमाव वाले क्षेत्रों का सर्वे कर प्राथमिकता तय की जाएगी। इसके बाद अलग-अलग क्षेत्रों में स्टॉर्म वाटर लाइन बिछाने का काम शुरू होगा। अगर योजना को मंजूरी मिलती है तो शहर के कई इलाकों को बड़ी राहत मिल सकती है।




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