चुनाव में एक साल बाकी लेकिन दावेदार क्षेत्र में सक्रिय
देपालपुर। दैनिक इंदौर संकेत में नगर परिषद चुनाव में 1 साल से अधिक समय अभी बाकी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में नगर के दावेदार क्षेत्र में सक्रियता दिख रहे हैं। भाजपा को कभी महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेसी घेरने का काम कर रहे तो कभी बेरोजगारी की आवाज उठा रहे हैं। इस बार देपालपुर में कांग्रेस की राह आसान दिखाई दे रही है। जिसका मुख्य कारण भाजपा में टिकट मांगने वालों की कतार दिखाई दे रही है। इतना ही नहीं देपालपुर में भाजपा कई हिस्सों में बंटी हुई है, जिसका फायदा परिषद चुनाव में कांग्रेसियों को मिलेगा।
सबसे पहला नाम देपालपुर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष संतोष ठाकुर का आता है। कलोता समाज से आते बड़े परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पहले भी नगर पंचायत में अध्यक्ष रह चुके हैं। विकास करने का एक लंबा अनुभव इनके पास मौजूद है। इनके कार्यकाल में देपालपुर नगर को सड़कों की सौगात प्रधानमंत्री से मिली। देपालपुर नगर की एक-एक सड़क को बनाया गया। दूसरी सबसे बड़ी समस्या पेयजल की थी। इन्हीं के कार्यकाल में पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर जल पहुंचाने का काम हुआ था।
दूसरा सबसे बड़ा नाम चार बार के पार्षद जितेंद्र गुड्डू ठाकुर का आता है। आम जनता से सीधा जुड़ाव कराने में माहिर हैं। कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा नेताओं से भी इनके सीधे संबंध हैं। पार्टी अगर इन्हें टिकट देती है तो कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा के वोट बैंक पर भी सेंध मार सकते हैं। इनके पास भी काम करने का एक लंबा अनुभव है।
तीसरा नाम कांग्रेस नेता महेंद्र मकवाना का आता है। युवा हैं, हंसमुख चेहरा है और आम जनता से सीधा जुड़ाव रखते हैं। कांग्रेस के कार्यक्रमों में हमेशा एक्टिव रहते हैं। पहले भी वार्ड 11 से टिकट मांगा था, लेकिन नगर परिषद के चुनाव पार्षदों से होना थे। इसलिए इस वक्त पर चुनाव नहीं लड़ा। कांग्रेस के पास तीनों ही मजबूत दावेदार हैं, लेकिन देखना होगा कांग्रेस किस पर अपना दांव लगाती है।
भाजपा की बात करें तो नगर परिषद अध्यक्ष के लिए कहीं ज्यादा दावेदार मैदान में हैं। कांग्रेस से भाजपा में गए पप्पू यादव का बड़ा नाम है। कांग्रेस से दो बार परिषद के अध्यक्ष रहे, दूसरा नाम गोपाल कटेसरिया का आता है, जो वर्तमान में परिषद में उपाध्यक्ष हैं। तीसरा नाम पार्षद अनिल धाकड़ का है। नगर परिषद के लिए मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। पार्षद रवि चौरसिया भी इस कतार में हैं।
भाजपा के पास एक नाम और है, जो चौंकाने वाला है। संगठन में सक्रिय मनोज पटेल के करीबी माने जाते हैं दिलीप यादव। इन पर भी भाजपा दांव लगा सकती है। लेकिन इस बार भाजपा को टिकट देने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अब देखना होगा यह राजनीतिक ऊंट आने वाले समय में किस करवट बैठता है।






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