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सरकारी जमीन में रहने वालों से होगी वसूली

निगम खोलेगा संपत्तिकर के खाते, नहीं मिलेगा मालिकाना हक

इंदौर। अवैध कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और राजस्व वसूली के बीच नगर निगम ने एक नया रास्ता निकालने की तैयारी की है। प्रशासन ने नोटरी के जरिए होने वाली रजिस्ट्रियों पर रोक लगा रखी है, इसके बावजूद निगम अब अवैध कॉलोनियों, सरकारी जमीन और बस्तियों में काबिज लोगों के नाम से जलकर और संपत्तिकर के खाते खोलने जा रहा है। हालांकि इन खातों के आधार पर संबंधित व्यक्ति को जमीन या मकान का मालिकाना हक नहीं मिलेगा। निगम इस बात को स्पष्ट रूप से दर्ज करेगा।

दरअसल, अवैध कॉलोनियों में लंबे समय से निगम सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराता रहा है। इसके साथ ही यहां रहने वाले लोगों से विभिन्न करों की वसूली भी की जाती है। कुछ समय पहले निगम ने इस तरह खाते खोलने पर रोक लगाई थी, लेकिन अब राजस्व बढ़ाने और वास्तविक उपयोगकर्ताओं से कर वसूलने के लिए फिर से प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। अवैध कॉलोनियों में भी निगम नागरिकों को सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। पहले इन क्षेत्रों में लोगों के नाम से हाल मुकाम के आधार पर खाते खोले जाते थे। अब इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए अवैध कॉलोनियों और सरकारी जमीन पर काबिज लोगों के नाम से जलकर और संपत्तिकर के खाते खोले जाएंगे।

निगम की यह व्यवस्था जमीन के स्वामित्व का प्रमाण नहीं बनेगी। यानी निगम में संपत्तिकर या जलकर का खाता खुलने से संबंधित व्यक्ति को रजिस्ट्री या मालिकाना अधिकार नहीं मिलेगा। इस संबंध में निगम पंजीयन विभाग को भी पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करेगा, ताकि इन खातों के आधार पर रजिस्ट्री या स्वामित्व का दावा न किया जा सके।

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