किताबों से चैटजीपीटी तक पहुंची पढ़ाई, बच्चे एक क्लिक में ढूंढ रहे जवाब
इंदौर। कभी होमवर्क में माता-पिता की मदद ली जाती थी, अब बच्चों का नया ‘ट्यूटर’ एआई बन गया है। मिडिल और सीनियर क्लास के कई छात्र गणित के सवालों से लेकर इंग्लिश, हिंदी-निबंध, प्रोजेक्ट और साइंस असाइनमेंट तक चैटजीपीटी और दूसरे एआई टूल्स से तैयार करा रहे हैं। इससे स्कूलों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या बच्चे सीख रहे हैं या सिर्फ उत्तर जमा कर रहे हैं?
शिक्षकों के लिए नई चुनौती
शिक्षकों का कहना है कि एआई से तैयार उत्तर अधिक व्यवस्थित और परिपक्व दिखाई देते हैं। ऐसे में कई बार पहचान पाना मुश्किल हो जाता है कि उत्तर विद्यार्थी ने लिखा है या एआई ने। एआई कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाता है। प्रोजेक्ट और प्रेजेंटेशन भी जल्दी तैयार हो जाते हैं। अलग-अलग स्रोतों की जानकारी एक जगह मिलती है। परीक्षा की तैयारी में समय बचता है।
एआई का उपयोग किस काम में सबसे ज्यादा
- प्रोजेक्ट — 62%
- निबंध — 48%
- होमवर्क — 40%
- गणित — 41%
- प्रेजेंटेशन — 29%
(आंकड़े छात्रों और शिक्षकों से बातचीत पर आधारित)
नुकसान—सोचने-लिखने की आदत कमजोर होगी
शिक्षकों का मानना है कि यदि विद्यार्थी हर सवाल का जवाब एआई से लेने लगेंगे तो उनकी खुद सोचने और लिखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। गलत या अधूरी जानकारी मिलने का खतरा भी बना रहता है। कॉपी-पेस्ट संस्कृति बढ़ने का जोखिम है और शिक्षकों के लिए असली तथा एआई से बने उत्तरों को पहचानना मुश्किल हो रहा है।
क्या कहते हैं शिक्षक
गरिमा विद्यालय के कंप्यूटर शिक्षक अंशुल चौहान बताते हैं कि 9वीं से 12वीं तक के छात्र प्रोजेक्ट, निबंध और गणित विषयों में एआई का सबसे अधिक उपयोग कर रहे हैं। इससे समय बचता है और विषय से जुड़ी जानकारी एक ही जगह मिल जाती है। हालांकि एआई पढ़ाई का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक माध्यम होना चाहिए।






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