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हार्डकोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं कम हुई भारी यूनिपोलों की संख्या

इंदौर शहर के मुख्य चौराहों, फुटपाथों और सड़क के डिवाइडरों पर तय मानकों से बड़े और भारी यूनिपोल लगा दिए गए हैं। तेज हवा या बारिश के दौरान इनके गिरने से राहगीरों और वाहन चालकों की जान पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।

यातायात में बाधा, बन गए जानलेवा-बेतरतीब ढंग से सड़कों तक घेरे गए ये विज्ञापन बोर्ड वाहन चालकों का ध्यान भटकाते हैं और अंधा मोड़ पैदा करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। 11 करोड़ नहीं 200 करोड़ का है यूनिपोल घोटाला, राशि बढ़ती जा रही है। राजस्व को नुकसान पहुंचाने के साथ ही नियमों को ताक पर रखकर बिना अनुमति विज्ञापन लगाने के कारण इंदौर नगर निगम के विज्ञापन विभाग को कथित तौर पर 11 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ बताया जा रहा है। जबकि इंदौर नगर निगम खजाने को 200 करोड़ से नुकसान हो रहा है या शुद्ध शब्दों में कहें तो यह मार्केट विभाग का बड़ा घोटाला है। जिसका आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पूर्व में व्यापक भ्रष्टाचार और वित्तीय हेरफेर के आरोपों के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने इसकी शिकायत तो दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी लेकिन ईओडब्ल्यू की जांच कछुआ चाल से भी धीमी रफ्तार पकड़े हुए है। फिलहाल इंदौर शहर में विज्ञापन अनुबंधों का खुला उल्लंघन हो रहा है।

ईओडब्ल्यू की जांच, कछुआ चाल

महापौर का आदेश या सिर्फ पल्ला झाड़ लेना मात्र क्योंकि हाईकोर्ट की फटकार के बाद इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू करने की बात कही थी। उन्होंने सबसे पहले राजनेताओं को कड़ा संदेश देने के लिए खुद की तस्वीरों वाले राजनीतिक और धार्मिक होर्डिंग्स को तुरंत हटाने के निर्देश दिए तो थे लेकिन हाल ही में आयोजित कार्यक्रमों में उन्हीं नेताओं के होर्डिंग और यूनिपोल पर वह खुद टंगे दिखे। नगर निगम की टीमों ने शुरुआती दिनों में कार्रवाई करते हुए रस्म अदायगी की। और अब यह जिम्मेदारी का अभियान मात्र नौटंकी साबित हो रहा है। शहरभर के अवैध कटआउट, बैनर और खतरनाक अवैध यूनिपोल, जिम्मेदारियों जिनमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त शिवम वर्मा को मुंह चिढ़ा रहे हैं। महापौर की यह टॉलरेंस को खुला चैलेंज दे रहे हैं। क्योंकि कांवड़ यात्रा तो निकल गई। जिस तरह से स्वागत द्वार के नाम पर सड़कें, जिम्मेदारों के कार्यालय तक घेर लिए गए। और जिम्मेदार सहमे अपने कार्यालयों में चुपचाप बैठे रहे। लेकिन कार्रवाई के नाम पर जीरो टॉलरेंस फुस्सी बम निकला।

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