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रिकॉर्ड से छेड़छाड़, फाइलें गायब और वेतन गड़बड़ी ने बढ़ाए सवाल, इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न

इंदौर। इंदौर नगर निगम में पिछले कुछ महीनों के दौरान सामने आए कई विवादों ने निगम की प्रशासनिक व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संपत्ति नामांतरण से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, महत्वपूर्ण फाइलों के गायब होने, वेतन भुगतान में अनियमितताओं, कर्मचारियों की विवादित सूची और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े मामलों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

सूत्रों के अनुसार, इन मामलों में कहीं जांच शुरू हो चुकी है, कहीं अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है, जबकि कुछ मामलों में अभी भी विस्तृत जांच जारी है। हालांकि कई अहम प्रश्न ऐसे हैं जिनका जवाब अब तक सामने नहीं आया है।

354 नामांतरण मामलों पर अब भी सवाल

नगर निगम में संपत्ति नामांतरण से जुड़े सैकड़ों मामलों की जांच के दौरान रिकॉर्ड में कथित अनियमितताएं सामने आईं। आरोप है कि कुछ मामलों में रिकॉर्ड में बदलाव कर संपत्तियों का नामांतरण किया गया और कई मामलों में आगे की प्रक्रिया भी पूरी हो गई। इस मामले में जांच चल रही है, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

वेतन भुगतान में गड़बड़ी की जांच

नगर निगम के मास्टर कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया की जांच के दौरान बैंक खातों में बदलाव और भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए जांच समिति गठित की है तथा संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

मूल फाइल गायब होने का मामला

संपत्ति कर से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण मूल फाइल रिकॉर्ड से गायब होने का मामला भी सामने आया। बताया गया कि जांच के दौरान फाइल उपलब्ध नहीं थी, जबकि बाद में उसकी प्रतियां सामने आईं। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की है।

कर्मचारियों की सूची पर विवाद

नगर निगम द्वारा जारी कर्मचारियों की सूची में ऐसे नाम शामिल होने पर विवाद खड़ा हो गया जो सेवा से बाहर हो चुके थे या अन्य कारणों से सूची में नहीं होने चाहिए थे। मामला सामने आने के बाद सूची की समीक्षा कर संशोधित सूची जारी की गई।

टेंडर प्रक्रिया भी चर्चा में

नगर निगम की रोड स्वीपिंग मशीनों से जुड़े टेंडर को लेकर भी सवाल उठे। टेंडर प्रक्रिया और शर्तों को लेकर विभिन्न स्तरों पर आपत्तियां सामने आईं। प्रशासन ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नए सिरे से कार्रवाई शुरू की है।

अब भी अनुत्तरित हैं कई प्रश्न

इन घटनाओं के बाद शहर में कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं—

  • कथित फर्जी नामांतरण मामलों में अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई?
  • डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्ति प्रबंधन प्रणाली कितनी सुरक्षित है?
  • रिकॉर्ड रूम और महत्वपूर्ण फाइलों की जवाबदेही किसकी है?
  • वेतन भुगतान प्रक्रिया में बैंक खातों में बदलाव कैसे संभव हुआ?
  • विवादित कर्मचारियों के नाम सूची में कैसे शामिल हुए?
  • प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसी चूक दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि विभिन्न मामलों की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की नजर अब इस बात पर है कि इन मामलों में अंतिम जांच रिपोर्ट कब सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

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